चंडीगढ़, 05 सितंबर 2026: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के एक ऐसे मानचित्र के इस्तेमाल का समर्थन किया जिसमें अफ्रीका का असली आकार ज्यादा साफ दिखता है। यह फैसला अफ्रीकी देशों और कई संगठनों के लंबे अभियान के बाद आया। टोगो ने इस प्रस्ताव को पेश किया था। अफ्रीकी संघ के सदस्यों ने इसका समर्थन किया।
मतदान में 164 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। सिर्फ अमेरिका ने इसका विरोध किया। सर्बिया एस्टोनिया जॉर्जिया लिथुआनिया मोल्दोवा और यूक्रेन ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया की सरकारों और संस्थानों को सदियों से इस्तेमाल हो रहे पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन की जगह इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। मर्केटर प्रोजेक्शन का इस्तेमाल आम तौर पर 16वीं सदी से हो रहा है। भूगोल विशेषज्ञों और इस अभियान से जुड़े संगठनों का कहना है कि यह नक्शा दुनिया के कई हिस्सों के वास्तविक आकार को सही तरीके से नहीं दिखाता।
नए इक्वल अर्थ नक्शे में महाद्वीपों को उनके वास्तविक अनुपात के ज्यादा करीब दिखाया गया है। इसका सबसे बड़ा फर्क अफ्रीका और ग्रीनलैंड के आकार में नजर आता है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के दिखाई देते हैं। जबकि वास्तविक क्षेत्रफल के हिसाब से अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन में अफ्रीका को उसके वास्तविक अनुपात के करीब दिखाया जाता है। समर्थकों का कहना है कि इससे दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के आकार को लेकर लोगों की समझ ज्यादा सही होगी।
प्रस्ताव पर मतदान से पहले टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने नक्शों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नक्शे दुनिया के बारे में हमारी समझ को आकार देते हैं। वे शिक्षा को दिशा देते हैं हमारी कल्पना को विकसित करते हैं और लोगों की सामूहिक सोच को प्रभावित करते हैं।
टोगो ने ही इस प्रस्ताव को महासभा में पेश किया था और अफ्रीकी संघ के कई देशों ने इसका समर्थन किया।
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