पटना, 21 मई 2026: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव और उसके कारण उत्पन्न वैश्विक संकट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में फर्टिलाइजर (उर्वरक) एवं ईंधन की खपत में 50 प्रतिशत की कटौती करने का आह्वान किया है। बिहार के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बंगलौर का दौरा किया।
दौरे के क्रम में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बंगलौर अवस्थित ‘श्री श्री एग्रीकल्चर ट्रस्ट’ द्वारा कड़े अनुसंधान के बाद विकसित एवं पेटेंट प्राप्त जैविक खाद तथा जैविक डी.ए.पी. (Organic DAP) के विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। ट्रस्ट के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के साथ हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में जैविक उर्वरकों की क्षमता, उत्पादन और उनके सकारात्मक प्रभावों पर गहन मंथन किया गया।
आर्ट ऑफ लिविंग के 45 वर्ष पूरे होने तथा गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के 70 वें जन्मदिन के अवसर पर एक समारोह आयोजित था. इस विशेष अवसर पर कृषि मंत्री ने वैश्विक मानवतावादी संत एवं आध्यात्मिक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से मुलाकात कर उनका मार्गदर्शन और आशीर्वाद भी प्राप्त किया।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान देश के कई राज्यों के शीर्ष नेतृत्व की गरिमामयी उपस्थिति रही। अवसर पर आन्ध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चन्द्रबाबू नायडू, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, महाराष्ट्र के सिंचाई मंत्री सहित महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश के मंत्री गण भी उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने कृषि क्षेत्र में जैविक विकल्पों की आवश्यकता और उनके दूरगामी फायदों पर चर्चा की।
इस अवसर पर कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि श्री श्री एग्रीकल्चर ट्रस्ट द्वारा विकसित यह जैविक उर्वरक आने वाले समय में हमारे किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है। यह रासायनिक उर्वरकों का सबसे प्रभावी और बेहतरीन विकल्प है।
कृषि मंत्री ने रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग पर चिंता जताते हुए कहा ”रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से आज मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ हमारी उपजाऊ भूमि और पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति हो रही है। यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य देना है, तो हमें हर हाल में जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा।”
विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि बिहार सरकार प्रधानमंत्री की मंशा के अनुरूप प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राज्य में ‘कृषि रोड मैप’ के माध्यम से बड़े पैमाने पर जैविक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बंगलौर में अनुसंधानित यह जैविक तकनीक बिहार के कृषि रोड मैप को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।
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