चंडीगढ़, 23 अप्रैल 2026: पंजाब का स्वास्थ्य क्षेत्र एक क्रांतिकारी बदलाव से गुज़र रहा है। पंजाब सरकार ने वादा किया था कि हर परिवार को सुविधाजनक, किफायती और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं। कई सालों तक, इलाज की ऊँची दरों ने मरीज़ों को इलाज में देरी करने, मेडिकल टेस्ट टालने या बीच में ही दवाएँ छोड़ देने पर मजबूर किया, जिससे परिवारों पर कर्ज़ चढ़ गया और स्वास्थ्य के नतीजों पर भी बुरा असर पड़ा। यह स्थिति, जो शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में आम थी, अब धीरे-धीरे बदल रही है।
भगवंत मान सरकार की एक अहम पहल ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना’ लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को तेज़ी से बढ़ा रही है। सिर्फ़ तीन महीनों में, 40 लाख से ज़्यादा हेल्थ कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का सालाना कवर मिल रहा है। इस योजना को बड़े पैमाने पर अपनाए जाने से इसकी ज़रूरत और लोगों का इस पर भरोसा साफ़ ज़ाहिर होता है। 21 अप्रैल को 28,766 रजिस्ट्रेशन हुए, जिससे पता चलता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था अब ज़्यादा जवाबदेह, सबको साथ लेकर चलने वाली और लोगों पर केंद्रित होती जा रही है।
इस योजना का सकारात्मक असर सभी ज़िलों में साफ़ दिखाई दे रहा है। लुधियाना 4.20 लाख कार्डों के साथ सबसे आगे है, उसके बाद पटियाला (3.82 लाख) और जालंधर (2.85 लाख) का नंबर आता है। अहम बात यह है कि इस योजना की पहुँच सिर्फ़ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं रही है। होशियारपुर, अमृतसर, मानसा, फ़ाज़िल्का और बरनाला जैसे टियर-2 और टियर-3 ज़िलों में भी इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिससे पता चलता है कि सरकार की यह स्वास्थ्य पहल तेज़ी से छोटे कस्बों तक पहुँच रही है, जहाँ इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
इस बदलाव की सबसे बड़ी पुष्टि ज़मीनी स्तर पर देखने को मिलती है। डॉ. मनिंदर सिंह भसीन कहते हैं, “स्वास्थ्य सेवाएँ कोई विशेषाधिकार नहीं होनी चाहिए।” पहले, कवरेज सीमित था, लेकिन अब हर निवासी इसके दायरे में आता है। वह आगे कहते हैं, “हाल के महीनों में, हमने 200 से ज़्यादा गॉल ब्लैडर (पित्ताशय) की सर्जरी की हैं। आमतौर पर इसका खर्च 40,000 रुपये से 80,000 रुपये तक आता है, लेकिन इस योजना के तहत मरीज़ों को कुछ भी भुगतान नहीं करना पड़ा।”
वह कहते हैं, “घुटने और कूल्हे के प्रत्यारोपण, जिनका खर्च 1 लाख रुपये से ज़्यादा आता है, अब रोज़ाना मुफ़्त में किए जा रहे हैं।” हम हर दिन लगभग 10 सर्जरी करते हैं, और ये सभी कैशलेस होती हैं।
इमरजेंसी केयर के बारे में डॉ. भसीन कहते हैं, “ST-T एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (STEMI) हार्ट अटैक में हर मिनट कीमती होता है। थ्रोम्बोलाइटिक दवा टेनेक्टेप्लेस की मदद से, जिसका इस्तेमाल हार्ट अटैक के दौरान खून के थक्कों को तेज़ी से घोलने के लिए किया जाता है, हम खून के बहाव को जल्दी से बहाल कर देते हैं और अब तक लगभग 100 मरीज़ों की जान बचा चुके हैं।”
बरनाला के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. करण चोपड़ा भी इसी तरह के बदलाव की पुष्टि करते हुए कहते हैं, “पहले मरीज़ सर्जरी को महीनों तक टालते रहते थे, लेकिन अब वे इलाज के लिए तुरंत आ रहे हैं। लोग हर सर्जरी पर 1 से 1.5 लाख रुपये बचा रहे हैं।”
ये भी देखे: पंजाब की मंडियों में 28 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आमद, 24 लाख मीट्रिक टन से अधिक की खरीद – लाल चंद कटारूचक्क