प्रधानमंत्री ने नए आपराधिक कानून राष्ट्र को किए समर्पित
चंडीगढ़, 4 दिसंबर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज के मैदान में आयोजित समारोह में संबोधित करते कहा तीन नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता (आईपीसी), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (सीपीसी), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (आईईए) को राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि तारीख पे तारीख का दौर खत्म हो गया है। अब पीडि़तों को जल्द न्याय मिलेगा। देश ने अंग्रेजी कानूनों से आजादी पा ली है और नए युग की शुरुआत हो चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये कानून न्याय प्रणाली को तेज और अधिक प्रभावी बनाएंगे, साथ ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस कदम को भारत के न्यायिक इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि बताया। मोदी ने कहा कि 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम के बाद, 1860 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) लागू की गई और बाद में भारतीय साक्ष्य अधिनियम और सीआरपीसी की संरचनाएं अस्तित्व में आईं। इन कानूनों का मकसद भारतीयों को दंडित करना था, ताकि वे गुलाम बने रहें। उन्होंने यह भी कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्वतंत्रता के दशकों बाद भी हमारे कानूनों में वह मानसिकता बरकरार रही। पीएम ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए चंडीगढ़ की सराहना की और कहा कि यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि जब इरादे मजबूत होते हैं, तो बदलाव संभव है।
प्रधानमंत्री ने नए आपराधिक कानून राष्ट्र को किए समर्पित
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