चंडीगढ़, 17 मार्च 2026: समाज सुधारक और राजनीतिक नेता बाबू कांशी राम की 92वीं जयंती के ठीक एक दिन बाद भारत रत्न देने की मांग करता एक प्रस्ताव आज पंजाब विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया हुआ। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में केंद्र सरकार से अपील की गई है कि वह बाबू कांशी राम जी को मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान करे। इस प्रस्ताव को पूरे सदन में सर्वसम्मति से समर्थन मिला और पंजाब सरकार इस मजबूत सिफारिश को केंद्र सरकार को भेजेगी।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा,“बाबू कांशी राम जी ने बाबा साहेब डॉ. बी.आर. आंबेडकर की विचारधारा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और सामाजिक-आर्थिक समानता का संदेश हर घर तक पहुंचाया। बाबू कांशीराम जी असाधारण ईमानदारी के प्रतीक थे। उन्होंने अपने नाम पर किसी भी प्रकार की संपत्ति, जमीन या बैंक खाता नहीं रखा और इसी तरह इस दुनिया को अलविदा कहा।”
उन्होंने आगे कहा,“बाबू कांशी राम जी ने जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करने के लिए पुणे में एक गजेटेड अधिकारी के रूप में अपना करियर छोड़ दिया। पहले ऑल इंडिया बैकवर्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीज एम्प्लॉइज फेडरेशन (बामसेफ़) की स्थापना करके और बाद में सक्रिय राजनीति में प्रवेश कर उन्होंने गरीब और मध्यम वर्गीय पृष्ठभूमि से आने वाले हजारों युवाओं को राष्ट्रीय राजनीति के मैदान में उतरने के लिए सशक्त किया।”
नेता के जीवन और राजनीतिक सफर पर प्रकाश डालते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा,
“बाबू कांशी राम जी का जन्म 15 मार्च 1934 को रोपड़ के ख्वासपुरा गांव में हुआ था और उन्होंने सरकारी कॉलेज रोपड़ से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। बाद में उन्होंने 1991 में उत्तर प्रदेश के इटावा से और 1996 में पंजाब के होशियारपुर से सांसद के रूप में सेवा दी तथा इसके बाद राज्यसभा में भी अपनी सेवाएं दीं।”
वित्त मंत्री ने कहा,“हाल ही में अपने कैबिनेट सहयोगी हरजोत सिंह बैंस के साथ मैंने बाबू कांशीराम जी से जुड़े रोपड़ जिले के गांव ख्वासपुरा और आनंदपुर साहिब के पृथीपुर बुंगा का दौरा किया। उनकी विरासत को स्थानीय स्तर पर सम्मान देने के लिए पंजाब सरकार ने एक स्थानीय स्कूल के पुनर्निर्माण और उन्नयन के लिए 2 करोड़ रुपये की अनुदान राशि स्वीकृत की है, जिसका नाम बाबू कांशी राम जी के नाम पर रखा जाएगा।
इसके अलावा, सरकार ने उनके पैतृक गांव में एक उच्च स्तरीय पुस्तकालय और एक आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण को भी मंजूरी दी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके ऐतिहासिक योगदान को सुरक्षित रखा जा सके।”]
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