नई दिल्ली, 23 सितंबर : अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद जंतर-मंतर पर अपनी पहली सार्वजनिक सभा ‘जनता की अदालत’ में संघ प्रमुख मोहन भागवत से पांच सवाल पूछे। आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक नयी राजनीतिक रणनीति के तहत रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जवाब मांगा। प्रधानमंत्री पर आरोप लगाते हुए उन्होंने पूछा, ‘जिस तरह से मोदी जी देशभर में लालच देकर, ईडी और सीबीआई की धमकी देकर दूसरी पार्टी के नेताओं को तोड़ रहे हैं, क्या ये लोकतंत्र के लिए सही है या हानिकारक?’ संघ प्रमुख से अन्य सवाल में उन्होंने पूछा कि क्या राजनीतिक नेताओं को ‘भ्रष्ट’ कहने और फिर उन्हें अपने पाले में शामिल करने की भाजपा की राजनीति से वह सहमत हैं? केजरीवाल ने यह भी पूछा कि जब भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने कहा कि उनकी पार्टी को अपने वैचारिक मार्गदर्शक आरएसएस की जरूरत नहीं है, तो उन्हें कैसा लगा? उन्होंने कहा कि क्या बेटा अब इतना बड़ा हो गया है कि वह अपनी मां को आंख दिखा रहा है? केजरीवाल ने कहा, ‘आरएसएस और भाजपा ने नियम बनाया था कि हर नेता 75 साल की उम्र होने पर सेवानिवृत्त हो जाएगा। अब अमित शाह कहते हैं कि यह नियम मोदी जी पर लागू नहीं होता।’ उन्होंने भागवत से पूछा, क्या आप इस तथ्य से सहमत हैं कि जो नियम आडवाणी जी पर लागू होता है, वह मोदी जी पर लागू नहीं होगा? इस नियम के तहत लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र जैसे वरिष्ठ नेताओं को सेवानिवृत्त कर दिया गया। इसके बारे में आप लोगों की क्या राए है।
जंतर मंतर पर अरविंद केजरीवाल ने किया पहली जनसभा को संबोधित
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