नई दिल्ली, 23 सितंबर : शिखर सम्मेलन की मेजबानी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डेलावेयर में अपने गृहनगर विलमिंगटन में की, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने भाग लिया। इस सम्मेलन में समुद्री क्षेत्र में चीन के आक्रामक रुख का जवाब देने के लिए क्वाड राष्ट्रों ने रविवार को अपने पहले संयुक्त तटरक्षक मिशन व क्षेत्रीय समुद्री पहल (मैत्री) की घोषणा की। इसके तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र के छोटे देशों को समुद्री सुरक्षा का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जबकि समुद्र पर नजर रखने के लिए डेटा साझा किया जाएगा। यह ऐलान ‘क्वाड’ नेताओं की बैठक के बाद संयुक्त रूप से जारी विलमिंगटन घोषणापत्र में किया गया। घोषणापत्र में कहा गया, ‘क्वाड अच्छे मकसद से बनाया गया समूह है, जो हिंद-प्रशांत के लिए वास्तविक, सकारात्मक और स्थायी प्रभाव छोड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘क्वाड किसी के खिलाफ नहीं है। हम सभी नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था, संप्रभुता के लिए सम्मान, क्षेत्रीय अखंडता और सभी मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करते हैं।ज् क्वाड कायम रहेगा, सहायता करेगा, साझेदारी करेगा और पूरक बनेगा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चार प्रमुख समुद्री लोकतांत्रिक देशों के रूप में हम इस गतिशील क्षेत्र में उस शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए स्पष्ट रूप से खड़े हैं, जो वैश्विक सुरक्षा एवं समृद्धि के लिए अनिवार्य है।’ चीन का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए कहा गया कि समूह किसी भी ऐसी अस्थिरकारी या एकतरफा कार्रवाई का दृढ़ता से विरोध करता है, जो बल या दबाव के जरिए यथास्थिति को बदलने की कोशिश करती है। घोषणापत्र में रूस-यूक्रेन संघर्ष में शांति की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है और इस्राइल-गाजा संकट को समाप्त करने के लिए दो-राज्य समाधान की वकालत की गयी है।
जो बाइडेन ने विलमिंगटन में शिखर सम्मेलन का किया गया आयोजन
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