वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित: 12 घंटे तक चली बहस

by Manu
वक्फ संशोधन विधेयक

नई दिल्ली, 3 अप्रैल 2025: वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 गुरुवार को लोकसभा में 12 घंटे की मैराथन बहस के बाद देर रात 2 बजे पारित हो गया। विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 सांसदों ने मतदान किया। सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के बाद यह फैसला ध्वनि मतों से हुआ। विधेयक का उद्देश्य 1995 के वक्फ कानून में संशोधन करना है, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों, खासकर गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने और सरकारी संपत्तियों पर वक्फ के दावे को खत्म करने, ने विवाद को जन्म दिया है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति: केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना अनिवार्य होगा।

दान की शर्त: केवल वही व्यक्ति वक्फ संपत्ति दान कर सकेगा, जो कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन कर रहा हो।

सरकारी संपत्ति पर नियंत्रण: वक्फ के रूप में पहचानी गई सरकारी संपत्तियों का स्वामित्व खत्म होगा और जिला कलेक्टर इसका मालिकाना हक तय करेंगे।

पारदर्शिता और प्रबंधन: सरकार का दावा है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाएगा और महिलाओं-बच्चों को लाभ पहुंचाएगा।

सरकार का पक्ष

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक का बचाव करते हुए कहा कि यह धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं, बल्कि संपत्ति प्रबंधन का कानून है। उन्होंने वक्फ द्वारा कथित तौर पर कब्जाई गई संपत्तियों की सूची पेश की, जिसमें दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 संपत्तियां, तमिलनाडु में 400 साल पुराना मंदिर, और प्रयागराज का चंद्रशेखर आजाद पार्क शामिल हैं। शाह ने कहा, “आप अपनी संपत्ति दान कर सकते हैं, दूसरों की नहीं। वक्फ ने कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति के चलते बड़े पैमाने पर जमीन हड़पी थी।” उन्होंने 2013 के संशोधन को इसका कारण बताया, जब चुनाव से 25 दिन पहले लुटियंस जोन की संपत्तियां वक्फ को दी गई थीं।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा, “1970 से दिल्ली में एक केस चल रहा था, जिसमें पुरानी संसद भवन भी शामिल था। अगर यह संशोधन नहीं लाते, तो यह इमारत भी वक्फ की हो सकती थी।” शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल नहीं किया जाएगा, बल्कि बोर्ड में उनकी मौजूदगी सिर्फ निगरानी के लिए होगी।

विपक्ष का विरोध

विपक्ष ने विधेयक को असंवैधानिक करार दिया। कांग्रेस के गौरव गोगोई ने कहा, “यह संविधान पर 4डी हमला है- अल्पसंख्यकों को बदनाम करना, उनके अधिकार छीनना, समाज को बांटना और संविधान को कमजोर करना।” उन्होंने सवाल उठाया कि अल्पसंख्यक आयोग की बैठकों में इसकी जरूरत का जिक्र क्यों नहीं हुआ।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतीकात्मक विरोध में विधेयक की प्रति फाड़ दी और कहा, “मैं गांधी की तरह इस कानून को तोड़ रहा हूं। यह अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन है।” शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल ने भाजपा पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जिस पार्टी का एक भी मुस्लिम सांसद नहीं, वह मुसलमानों की चिंता कैसे कर रही है? आपने हमारे गुरुद्वारे तोड़े, अयोध्या में मुस्लिम को जगह नहीं दी। आप टुकड़े-टुकड़े गैंग हैं।”

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