समराला की बैठक ने भी रैली का रूप धारण किया, अकाली कार्यकर्ता लामबंद

by TheUnmuteHindi
समराला की बैठक ने भी रैली का रूप धारण किया, अकाली कार्यकर्ता लामबंद

समराला: श्री अकाल तख्त साहिब से गठित भर्ती समिति की ज़िला-स्तरीय बैठकों को जहां भारी जनसमर्थन मिला, वहीं आज हलका समराला में हुई बैठक ने भी एक बड़ी रैली का रूप ले लिया । इस बैठक में भर्ती समिति के सदस्य सरदार मनप्रीत सिंह अयाली, जत्थेदार इकबाल सिंह झूंदा और जत्थेदार संता सिंह उमैदपुरी विशेष रूप से उपस्थित रहे । अपने संबोधन में सरदार मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि आज पंजाब का हर वर्ग दुखी और निराश है, जिसका मुख्य कारण सक्षम राजनीतिक नेतृत्व का अभाव है। उन्होंने कहा कि बड़े-बड़े वादे कर सत्ता में आने के बाद पलट जाना पंजाबियों को हताश कर चुका है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज हमारी बड़ी संस्थाओं को कमजोर करने की साज़िश हो रही है, और क़ौम की प्रमुख हस्तियों को अपमानित कर हटाया जा रहा है ।

इसका उद्देश्य पंजाब और पंथ की नुमाइंदगी करने वाले संगठन को मज़बूत करना था

उन्होंने दो दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब से जारी हुए हुकमनामे का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य पंजाब और पंथ की नुमाइंदगी करने वाले संगठन को मज़बूत करना था, ताकि वह पंजाब के हक की रक्षा कर सके। लेकिन अफ़सोस की बात है कि आज की राजनीतिक नेतृत्व नैतिक आधार खो चुकी है और पार्टी के भले के लिए बनी पंछ प्रधान भर्ती समिति के सदस्यों की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं । उन्होंने यह भी कहा कि उनका कोई व्यक्तिगत राजनीतिक स्वार्थ नहीं है, बल्कि वे पार्टी की पुनर्संगठन के लिए आगे बढ़ रहे हैं। हर बैठक में उमड़ रही भीड़ इस बात का प्रमाण है कि जनता बदलाव चाहती है। उन्होंने कहा कि अगली रणनीति और कार्यक्रमों की जानकारी के लिए कार्यकर्ता लगातार पूछ रहे हैं, और उनकी प्राथमिकता हमेशा पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत रहेगी ।

2022 के विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद, समिति के सदस्य लगभग 100 हलकों में गए और कार्यकर्ताओं के सुझाव लिए

झूंदा कमेटी रिपोर्ट का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद, समिति के सदस्य लगभग 100 हलकों में गए और कार्यकर्ताओं के सुझाव लिए । इनमें सबसे बड़ी मांग नेतृत्व परिवर्तन की थी, ताकि पार्टी को परिवारवाद की राजनीति से बाहर निकाला जा सके। साथ ही, पार्टी में प्रभावशाली हो चुके उन नेताओं पर रोक लगाने की मांग उठी, जिन पर प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से धन अर्जित करने के आरोप लगे थे । उन्होंने कहा कि रिपोर्ट को अक्षरशः लागू करना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के चलते इसे दरकिनार कर दिया गया, जिसका नतीजा यह हुआ कि लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी किसी भी व्यक्ति विशेष से निजी राजनीतिक दुश्मनी नहीं है, बल्कि वे 2027 में पंजाब में अकाली दल को पुनः सत्ता में लाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं ।

आज हर पंजाबी चाहता है कि राजनीति को परिवारवाद के प्रभाव से मुक्त किया जाए

सरदार इकबाल सिंह झूंदा ने भी इस मौके पर कहा कि आज हर पंजाबी चाहता है कि राजनीति को परिवारवाद के प्रभाव से मुक्त किया जाए, और इसके लिए पार्टी के संविधान में बड़े बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि समय-समय पर जनता की मांग के अनुसार बदलाव होते रहे हैं और आगे भी ज़रूरी हैं। पंथक और अकाली राजनीति में संवैधानिक बदलाव की आज पूरी कौम मांग कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को विश्वास दिलाया कि यह समय नेतृत्व परिवर्तन का नहीं, बल्कि समर्पित नेतृत्व की अगुवाई में आगे बढ़ने का है । जत्थेदार संता सिंह उमैदपुरी ने अपने संक्षिप्त धन्यवाद भाषण में कहा कि आज के इस विशाल जनसमूह ने यह साबित कर दिया है कि पांच सदस्यीय भर्ती समिति के नेतृत्व में पूरा पंथ और अकाली दल एकजुट हो रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कार्यकर्ताओं की उम्मीदों को किसी भी कीमत पर टूटने नहीं दिया जाएगा। हलका समराला हमेशा पंथक एकता का समर्थक रहा है, और आज की सभा में भारी संख्या में संगत की उपस्थिति इसका प्रमाण है ।

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