नई दिल्ली: 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा ने अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर भारत में अपने प्रत्यर्पण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। राणा का तर्क है कि अगर उन्हें भारत भेजा गया, तो उनकी जान को खतरा हो सकता है और उन्हें गंभीर यातनाओं का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि वह पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम हैं। उनका कहना है कि भारत में उनके खिलाफ आरोपों और उनके धार्मिक, राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक पहचान के कारण उन्हें प्रताड़ित किया जा सकता है, जो उनकी जान के लिए खतरा साबित हो सकता है।
अपनी याचिका में राणा ने कहा है कि यदि अमेरिकी अदालतें उनके मामले पर कोई कार्रवाई नहीं करतीं और भारत में प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जारी रहती है, तो उन्हें तुरंत मौत का खतरा हो सकता है। उन्होंने इस मामले में अमेरिकी अदालतों से अपील की है कि यदि रोक नहीं लगाई जाती है, तो वह जल्द ही मौत के मुंह में चले जाएंगे। राणा ने अपनी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का हवाला भी दिया, जिसमें उन्हें पेट की महाधमनी के फटने का जोखिम, पार्किंसंस रोग और मूत्राशय के कैंसर के संकेत जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
तहव्वुर राणा ने भारतीय जेलों में जान का खतरा बताया
राणा ने यह भी कहा कि भारतीय जेलों में भेजे जाने पर उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है क्योंकि उन्हें राष्ट्रीय, धार्मिक और सांस्कृतिक आधार पर निशाना बनाया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि अमेरिकी अदालतों के पास अधिकार क्षेत्र खोने पर उनकी याचिका की समीक्षा करना संभव नहीं होगा।
अमेरिका ने भारत को राणा के प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी थी, और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले का समर्थन करते हुए राणा को “बहुत बुरा” करार दिया था। तहव्वुर राणा, पाकिस्तान-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का करीबी सहयोगी था, जो मुंबई हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। राणा के संबंध लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से बताए जाते हैं।
हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में राणा द्वारा दायर की गई समीक्षा याचिका को खारिज कर दिया, जिससे उनकी प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की उम्मीदें समाप्त हो गईं।
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