बांगलादेश ने पठायपुस्तकों में इतिहास को लेकर किया बदलाव

नोटों से भी शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाने का फैसला

by TheUnmuteHindi
बांगलादेश ने पठायपुस्तकों में इतिहास को लेकर किया बदलाव

बांगलादेश ने पठायपुस्तकों में इतिहास को लेकर किया बदलाव
नोटों से भी शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर हटाने का फैसला
नई दिल्ली, 3 जनवरी : बांगलादेश में जहां अल्पसंख्यकों पर लगातार हमले बढ़ते जा रहे हैं, वहीं बता दें कि कुछ समय पहले भी बांग्लादेश ने अपने पुराने नोटों से शेख मुजीबुर्रहमान की तस्वीर को हटाने का निर्णय लिया था। यह कदम शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी और प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद उठाया गया था। हसीना के भारत जाने के बाद मुजीबुर्रहमान की प्रतिमाओं और तस्वीरों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा अंतरिम सरकार ने शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या की बरसी 15 अगस्त के राष्ट्रीय अवकाश को भी रद्द कर दिया था। अब लगातार बांगलादेश द्वारा सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। एक ताजा मामले में बांग्लादेश ने अपनी नई पाठ्यपुस्तकों में इतिहास को लेकर बड़ा बदलाव किया है। इन पुस्तकों में अब यह कहा जा रहा है कि बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1971 में जियाउर रहमान ने देश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी। इससे पहले तक यह माना जाता रहा था कि स्वतंत्रता की घोषणा बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान ने की थी। वहीं दूसरी ओर पाठ्यपुस्तकों के बदलाव में शामिल रहे लेखक और शोधकर्ता राखल राहा ने कहा कि उनका उद्देश्य इन पुस्तकों को “अतिशयोक्तिपूर्ण, थोपे गए इतिहास से मुक्त करना था। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य सही नहीं था कि शेख मुजीबुर्रहमान ने पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तारी के दौरान वायरलेस संदेश के जरिए स्वतंत्रता की घोषणा की थी इसलिए इसे हटा दिया गया।
शेख मुजीबुर्रहमान से राष्ट्रपिता की उपाधि हटाई
जानकारी के अनुसार नई पाठ्यपुस्तकों में एक और बड़ा बदलाव यह हुआ है कि शेख मुजीबुर्रहमान से राष्ट्रपिता की उपाधि हटा दी गई है। इससे पहले बांग्लादेश में शेख मुजीब को राष्ट्रपिता के रूप में सम्मानित किया जाता था लेकिन अब यह उपाधि समाप्त कर दी गई है। दूसरी ओर नई पाठ्यपुस्तकों में यह उल्लेख किया गया है कि 26 मार्च 1971 को जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी और 27 मार्च को उन्होंने शेख मुजीबुर्रहमान की ओर से भी स्वतंत्रता का ऐलान किया। बांग्लादेश के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर एकेएम रियाजुल हसन ने कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2025 के लिए यह नया बदलाव किया गया है।

You may also like