चंडीगढ़, 31 मई 2026: पंजाब सरकार ने आज 19,000 से अधिक सरकारी स्कूलों में एक विशाल अभिभावक-शिक्षक बैठक (PTM) का आयोजन किया। पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नीति आयोग की ‘स्कूल शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026’ में पंजाब की नंबर एक रैंकिंग का जश्न मनाने के लिए किया गया था।
इस रिपोर्ट में पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ दिया है, जिसे लंबे समय से स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में भारत का ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ (सर्वोच्च मानक) राज्य माना जाता रहा है। पंजाब ने बुनियादी शिक्षा के प्रमुख मापदंडों पर केरल से बेहतर प्रदर्शन किया है।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि सभी हितधारकों की सामूहिक सफलता को मान्यता देते हुए, आज शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उनके अथक प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को विशेष पहचान दी गई और प्रमाण पत्र वितरित किए गए; इनमें बोर्ड परीक्षा के टॉपर, ‘इंग्लिश एज प्रोग्राम’ के सफल छात्र और JEE परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र शामिल थे।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि 20 लाख से अधिक अभिभावकों ने इस विशाल PTM और अभिभावक कार्यशाला में भाग लिया। इस व्यापक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बच्चों में सीखने की प्रक्रिया की निरंतरता बनाए रखना, छुट्टियों के गृहकार्य (होमवर्क) का प्रबंधन करना और सकारात्मक दिनचर्या विकसित करना था।
इस व्यापक कार्यक्रम के उच्च-गुणवत्ता वाले कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए, सभी शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को YouTube पर आयोजित लाइव सत्रों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया था। शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षित सहायक कर्मचारियों और सक्रिय ‘स्कूल प्रबंधन समितियों’ ने जमीनी स्तर पर अभिभावकों से संबंधित गतिविधियों को संगठित करने, उनमें समन्वय स्थापित करने और उन्हें लागू करने में भरपूर सहयोग प्रदान किया।
हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “यह नंबर 1 रैंक केवल सरकार की नहीं है, बल्कि हर उस अभिभावक की है जिसने सरकारी स्कूलों पर भरोसा जताया; हर उस छात्र की है जिसने कड़ी मेहनत की; और हर उस शिक्षक की है जिसने किताबों से आगे बढ़कर बच्चों को शिक्षा प्रदान की। हमने सरकारी स्कूलों को ‘अंतिम विकल्प’ से बदलकर ‘पहली पसंद’ बना दिया है। दशकों तक यह माना जाता था कि सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव नहीं है, लेकिन पंजाब ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। यह रैंक उस ‘शिक्षा क्रांति’ को दर्शाती है, जिसका उदय हमारे स्कूलों की कक्षाओं से हुआ है।”
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