पटना, 13 जून 2026: पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल सचिव की अध्यक्षता में आज विभागीय सभाकक्ष में बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) के अंतर्गत आने वाले 60 मीटर से अधिक लंबाई के पुलों की सुरक्षा एवं वर्तमान स्थिति से जांच रिपोर्ट की एक उच्च स्तरीय समीक्षा की गई। इस समीक्षा बैठक में विभाग के वरीय अभियंता एवं बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के पदाधिकारी उपस्थित थे।
समीक्षा के दौरान सचिव महोदय को अवगत कराया गया कि राज्यभर में 60 मीटर से अधिक लंबाई वाले कुल 638 पुलों को चिन्हित कर सभी 638 पुलों की जांच पूरी कर ली गई है। पश्चिम चंपारण में 49, पटना में 36, मुजफ्फरपुर में 39, अररिया में 38, पूर्णिया में 27, किशनगंज में 37, कटिहार में 36, सुपौल में 35, पूर्वी चम्पारण में 30, दरभंगा में 29 गयाजी में 25, नवादा में 20 जमुई में 16 एवं सहरसा में 19 सहित कुल 638 पुलों की गहन जांच की गई है।
जांच में कुल 23 पुल गंभीर स्थिति में पाए गए हैं, जिनमें से 10 पुलों की मरम्मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। 5 क्रिटिकल स्थानों पर नए ब्रिज बनाए जाएंगे। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल 4 पुलों पर भारी वाहनों का प्रवेश वर्जित कर केवल छोटी और हल्की गाड़ियों के परिचालन की अनुमति दी गई है। एक अन्य संवेदनशील स्थल पर सुचारू आवागमन हेतु वैकल्पिक डायवर्जन निर्माण का कार्य प्रगति पर है। वहीँ, 8 ब्रिजों के मेंटेनेंस हेतु टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सचिव ने निदेशित किया कि टेंडर की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराएं।
इसके अलावा जांच में 50 पुलों में सामान्य मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पाई गई है। इन सभी पर विभागीय अभियंताओं की देखरेख में तीव्र गति से कार्य संचालित किया जा रहा है। सचिव द्वारा प्रत्येक ब्रिज की जांच रिपोर्ट की समीक्षा की गई एवं अभियन्ताओं को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने हेतु दिशानिर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिन पुलों में किसी भी प्रकार की मरम्मत की आवश्यकता पाई गई है, उन पर अविलंब युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया जाए।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि आईआईटी पटना के द्वारा राज्य के अत्यंत महत्वपूर्ण एवं लाइफलाइन माने जाने वाले 250 मीटर से अधिक लंबाई वाले 47 पुलों की जांच की गई है। आईआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट पर अग्रतर कार्रवाई की जा रही है।
सचिव ने कहा कि पुलों की लगातार निगरानी के लिए व्यवस्था और सुदृढ़ की जाय ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की क्षति की पूर्व सूचना ससमय प्राप्त हो सके और बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि जिन प्रमंडलों में कार्य की गति धीमी पाई जाएगी या गुणवत्ता में कमी होगी, वहाँ के संबंधित अभियंताओं पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ये भी देखे: पथ निर्माण विभाग द्वारा 93 करोड़ की लागत से जयनगर-घुरना सड़क का मजबूतीकरण शुरू