नशों के खिलाफ जंग अभियान में कार्रवाई तेज, एनडीपीएस मामलों में 40% की वृद्धि

by Manu
तरनतारन पुलिस 15 किलो हेरोइन के साथ तस्कर गिरफ्तार

चंडीगढ़, 24 अप्रैल 2026: ‘नशों के खिलाफ जंग’ (War on Drugs) अभियान पंजाब में असरदार और प्रभावी नतीजे दे रहा है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार नशों के खिलाफ कार्रवाई में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है। नशों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को काफ़ी हद तक खत्म कर दिया गया है। ‘नशों के खिलाफ जंग’ अभियान के तहत आरोपियों को सज़ा दिलाने की दर में भी काफ़ी सुधार हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2026 (अब तक) के बीच NDPS के 73,541 मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2017-21 के 52,255 मामलों के मुकाबले 40 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी दिखाता है। गिरफ्तारियों की संख्या में भी काफ़ी बढ़ोतरी हुई है, जो 68,064 से बढ़कर 98,596 हो गई है; यह पूरे राज्य में नशों की तस्करी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ लगातार और बड़े पैमाने पर हो रही कार्रवाई का संकेत है।

नशों की ज़ब्ती के आंकड़े इस अभियान की सफलता को और भी साफ तौर पर दिखाते हैं, जिससे पता चलता है कि नशों की सप्लाई चेन में कितनी गहरी पैठ बनाई गई है। हेरोइन की ज़ब्ती में 148% की बढ़ोतरी हुई है—2017–21 में 2,412 किलोग्राम हेरोइन ज़ब्त की गई थी, जबकि 2022 से अब तक 5,979 किलोग्राम हेरोइन ज़ब्त की जा चुकी है। अफ़ीम की ज़ब्ती में भी 43% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है और यह बढ़कर 3,583 किलोग्राम हो गई है, जो ज़मीनी स्तर पर कार्रवाई के तेज़ होने को दिखाता है।

सिंथेटिक नशों के खिलाफ कार्रवाई में खास तौर पर एक बड़ी उछाल देखने को मिली है। ‘आइस’ (क्रिस्टल मेथामफेटामाइन) की ज़ब्ती 17 किलोग्राम से बढ़कर 93 किलोग्राम हो गई है, जो 447% की बढ़ोतरी है। कोकीन की ज़ब्ती बढ़कर 6,064 किलोग्राम हो गई है, जो पिछले रिकॉर्ड 6,852 किलोग्राम के लगभग बराबर ही है।

इस अभियान ने अब दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए भी अपनी पहुँच बढ़ा दी है। 2022–26 के दौरान 8.7 करोड़ टैबलेट और कैप्सूल ज़ब्त किए गए हैं; यह दिखाता है कि युवाओं में बढ़ते नशे की लत को रोकने के लिए सप्लाई चेन पर ज़ोरदार कार्रवाई की जा रही है।

पंजाब के DGP गौरव यादव ने कहा, “यह सिर्फ़ कार्रवाई में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के हमारे तरीके में एक बुनियादी बदलाव है। मामलों और ज़ब्ती में बढ़ोतरी इंटेलिजेंस-आधारित कार्रवाई को दर्शाती है, जबकि बढ़ती दोषसिद्धि दर यह दिखाती है कि मामलों को अंतिम चरण तक पहुँचाया जा रहा है। सप्लायर से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर तक, पूरी चेन पर लगातार दबाव बना हुआ है।”

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