चंडीगढ़, 03 मार्च 2026: सीटी यूनिवर्सिटी में “रंग उत्सव” का भव्य दो दिवसीय आयोजन किया गया। इसका संचालन डिवीजन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर द्वारा किया गया। इस आयोजन में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने परंपरा, रचनात्मकता और भक्ति के सुंदर समन्वय के साथ होली पर्व का उत्साहपूर्वक उत्सव मनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल-स्तरीय मटका सजावट प्रतियोगिता से हुई। इसमें विद्यार्थियों ने कलात्मक कौशल और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अद्भुत प्रदर्शन करते हुए मिट्टी के घड़ों को आकर्षक रूप से सजाया।
इस प्रतियोगिता ने परिसर के वातावरण को रंगों और रचनात्मकता से सराबोर कर दिया।
प्रतियोगिता का रिजल्ट
प्रथम स्थान: School of Law
द्वितीय स्थान: School of Management Studies
तृतीय स्थान: School of Hotel Management, Airlines and Tourism
दूसरे दिन परिसर में भगवान श्रीकृष्ण के अभिषेक के साथ आध्यात्मिक वातावरण गूंज उठा, जिसके पश्चात शांतिमय और मनमोहक पुष्प होली का आयोजन किया गया। रंगों के स्थान पर सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए, जिससे परिसर में पवित्र और सकारात्मक वातावरण का सृजन हुआ, जिसने विद्यार्थियों के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। इस्कॉन के भजनों की मधुर प्रस्तुति ने आध्यात्मिक माहौल को और अधिक दिव्य बना दिया तथा पूरे विश्वविद्यालय में शांति और सकारात्मकता का संचार किया।
पारंपरिक दही हांडी उत्सव ने कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह का संचार किया, जो भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं की आनंदमयी परंपरा, एकता और टीम भावना का प्रतीक है।
अपने विचार साझा करते हुए, डिवीजन ऑफ स्टूडेंट वेलफेयर के निदेशक, Er. Davinder Singh ने कहा, “सीटी यूनिवर्सिटी में रंग उत्सव हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को संजोने और विद्यार्थियों के बीच एकता तथा सकारात्मकता को प्रोत्साहित करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन आजीवन स्मृतियाँ निर्मित करते हैं और विश्वविद्यालय परिवार के बीच आपसी संबंधों को सुदृढ़ बनाते हैं।”
प्रो चांसलर, Dr. Manbir Singh ने कहा, “पुष्प होली और रंग उत्सव जैसे पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक जड़ों का प्रतिबिंब हैं। सीटी यूनिवर्सिटी में हम मानते हैं कि शिक्षा केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है — यह मूल्यों, एकता, रचनात्मकता और आंतरिक विकास का पोषण करने का माध्यम है। विद्यार्थियों को इतनी श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ उत्सव मनाते देखना हमारे लिए गर्व का विषय है। ऐसे क्षण हमारी सामुदायिक भावना को सशक्त करते हैं और सामाजिक रूप से जिम्मेदार व्यक्तित्वों का निर्माण करते हैं, जो परंपरा के सार को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाते हैं।”
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