सातवीं सदी की गंगा प्रतिमा से प्रेम मंदिर तक, इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखी यूपी की शानदार विरासत की झलक

by Manu
इंटरनेशनल ट्रेड शो

ग्रेटर नोएडा, 28 सितंबर 2026: सातवीं सदी की गंगा प्रतिमा से लेकर दसवीं सदी की गरुड़ पर सवार लक्ष्मी-नारायण और 12वीं सदी की सरस्वती प्रतिमा तक, उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में संस्कृति विभाग का स्टॉल राज्य की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है। इंडिया एक्सपो मार्ट में लगी यह प्रदर्शनी प्राचीन प्रतिमाओं, डिजिटल पांडुलिपियों, पेंटिंग्स और ऐतिहासिक स्थलों की प्रतिकृतियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की कला और संस्कृति के विभिन्न दौरों को दिखाती है।

बहुत से लोग इस प्रदर्शनी को देखने आ रहे हैं। स्टॉल के मुख्य प्रवेश द्वार को प्रेम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार और ब्रह्मांड द्वार की तरह बनाया गया है, जो आने वाले लोगों के लिए सेल्फी लेने की एक आकर्षक जगह बन गया है।

इस प्रदर्शनी में राज्य के अलग-अलग हिस्सों से मिली प्राचीन प्रतिमाएं दिखाई गई हैं। प्रदर्शनी में मिर्जापुर से मिली दसवीं सदी की गरुड़ पर सवार लक्ष्मी-नारायण की प्रतिमा, सुल्तानपुर में मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा, कानपुर के रानीपुर से मिली दसवीं सदी की महेश्वर की प्रतिमा और अल्मोड़ा में मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा शामिल हैं। गोरखपुर से मिली 12वीं सदी की सरस्वती प्रतिमा लोगों का ध्यान खींच रही है। सातवीं सदी की गंगा प्रतिमा भी खास आकर्षण का केंद्र है।

ये प्रतिमाएं अलग-अलग दौर की भारतीय कारीगरी, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक जीवन की झलक दिखाती हैं। छात्रों और युवाओं में इन प्राचीन धरोहरों को लेकर खास उत्सुकता देखी जा रही है। कई युवा दर्शक इन प्रतिमाओं के इतिहास और उनके बनने के समय के बारे में भी जानकारी ले रहे हैं।

प्रदर्शनी में ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को खास जगह दी गई है। स्टॉल के प्रवेश द्वार को प्रेम मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार और ब्रह्मांड द्वार की तरह बनाया गया है। इसकी भव्य बनावट आने वाले लोगों को आकर्षित कर रही है, जो यहां तस्वीरें और सेल्फी लेते हुए देखे जा सकते हैं। इस तरह, यह गेटवे न सिर्फ़ प्रदर्शनी के सांस्कृतिक संदेश का हिस्सा बन गया है, बल्कि आकर्षण का केंद्र भी बन गया है।

नई दिल्ली से प्रदर्शनी देखने आईं 11वीं कक्षा की छात्रा आयुषी ने कहा कि अब तक उन्होंने ऐसी प्राचीन मूर्तियाँ सिर्फ़ किताबों में तस्वीरों के तौर पर देखी थीं। यहाँ उन्हें इन्हें असल में देखने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनियाँ छात्रों को भारतीय और सनातन संस्कृति को और करीब से समझने में मदद करती हैं।

राज्य ललित कला अकादमी ने अलग-अलग चित्रकारों की कलाकृतियाँ भी प्रदर्शित की हैं। सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ, प्रदर्शनी में समकालीन कला को भी जगह दी गई है। यहाँ चित्रकार मौके पर ही आने वाले लोगों के चित्र बना रहे हैं। इससे प्रदर्शनी का माहौल जीवंत हो उठता है।

अलग-अलग दौर की पांडुलिपियों को डिजिटल फ्रेम में प्रदर्शित किया गया है। इसके ज़रिए युवा पीढ़ी आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्राचीन ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक सामग्री को देख और समझ सकती है। प्रदर्शनी में मथुरा के महावन में रसखान की समाधि, गोवर्धन में कुसुम सरोवर और मिर्ज़ापुर में सारनाथ मंदिर की प्रतिकृतियाँ भी शामिल हैं।

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