चंडीगढ़, 20 मई 2026: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज अपने पैतृक गाँव सतौज में बिजली के तारों को ज़मीन के नीचे बिछाने की एक पहल की नींव रखी। इस पायलट प्रोजेक्ट का मकसद पंजाब के इस गाँव को देश का पहला ‘पोल-मुक्त’ (खंभों से मुक्त) गाँव बनाना है।
किसानों और गाँव वालों को बड़ी राहत देते हुए, भगवंत मान सरकार ने बिजली के तारों को ज़मीन के नीचे बिछाना शुरू कर दिया है। इसका मकसद फ़सलों में आग लगने और जानलेवा हादसों को रोकना, साथ ही ऊपर से गुज़रने वाली तारों की वजह से होने वाले बार-बार के बिजली कट्स को खत्म करना है। इससे गाँव खतरनाक खंभों और उलझे हुए तारों के जाल से भी आज़ाद हो जाएँगे।
इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत, सतौज से 384 बिजली के खंभे हटा दिए जाएँगे और सड़कों को खोदे बिना ही ज़मीन के नीचे केबल बिछाई जाएँगी। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इस प्रोजेक्ट को आधुनिक बुनियादी ढांचे, बिना रुकावट बिजली सप्लाई और सुरक्षित गाँवों पर आधारित “रोशन पंजाब” की शुरुआत बताया।
‘सतौज मॉडल’ को पूरे देश के लिए एक मिसाल बताते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार ने पंजाब के किसानों से किया अपना वादा पूरा कर दिया है, जिसके तहत गाँवों को तारों के जाल से मुक्त किया जाना था। उन्होंने कहा कि बिजली की सप्लाई ज़मीन के नीचे होने से, गाँवों में बिजली के खंभे लगाने की राजनीति भी खत्म हो जाएगी।
इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आज पंजाब के गाँवों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है, क्योंकि यहाँ से गाँवों को बिजली के तारों के जाल और फालतू खंभों से आज़ाद कराने का एक बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत, सतौज में ऊपर से गुज़रने वाली बिजली की तारों को ज़मीन के नीचे बिछाया जाएगा, जिस पर लगभग 8 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। यह देश में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है और इस पहल के साथ, पंजाब पूरे देश के लिए एक मिसाल बनकर उभरेगा।”
प्रोजेक्ट की तकनीकी बारीकियों के बारे में जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इस प्रोजेक्ट के तहत, 7 किलोमीटर लंबी हाई टेंशन (HT) लाइनें, 9.5 किलोमीटर लंबी लो टेंशन (LT) लाइनें और 41 किलोमीटर लंबी सर्विस केबल (जो 800 घरों को बिजली से जोड़ेगी) ज़मीन के नीचे बिछाई जाएँगी। सतौज के 66 KV ग्रिड से गाँव को जोड़ने वाले तीन 11 KV फीडरों की सभी हाई टेंशन लाइनें, और उनसे जुड़े 28 ट्रांसफ़ॉर्मरों की लाइनें भी ज़मीन के नीचे बिछाई जाएँगी।
इसके बाद, उन 28 ट्रांसफ़ॉर्मरों से लेकर मीटर बॉक्स तक जाने वाली सभी लो टेंशन लाइनें भी ज़मीन के नीचे ही बिछाई जाएँगी।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा, “मीटर बॉक्स को सभी घरों से जोड़ने वाले केबल भी ज़मीन के नीचे बिछाए जाएँगे, जिससे 384 गैर-ज़रूरी बिजली के खंभे हटा दिए जाएँगे। इस प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि ज़मीन के नीचे केबल बिछाने के लिए सड़कों की खुदाई करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि ज़मीन के नीचे पाइप बिछाने के लिए ‘ट्रेंचलेस ड्रिलिंग मशीन’ का इस्तेमाल किया जाएगा। ये पाइप ज़मीन से तीन फुट नीचे बिछाए जाएँगे, जो आम लोगों के लिए वरदान साबित होंगे।”
ऊपर से गुज़रने वाली बिजली की लाइनों के खतरों का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “बिजली के खंभों और ऊपर से गुज़रने वाले तारों से जानवरों और लोगों, खासकर बच्चों को बिजली का झटका लगने का खतरा बना रहता है।
उन्होंने कहा कि अक्सर तब दुर्घटनाएँ होती हैं, जब ट्रैक्टर, कंबाइन और दूसरे वाहन ऊपर से गुज़रने वाले तारों के संपर्क में आ जाते हैं। इसी तरह, फसलों में आग लगने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। बारिश, तूफ़ान और तेज़ हवाओं के कारण खंभे और तार टूट जाते हैं, जिससे बिजली की सप्लाई पर असर पड़ता है और बिजली निगम को आर्थिक नुकसान होता है।”
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