चंडीगढ़, 15 मई 2026: Adolescence kise kahate hain: किशोरावस्था (Teenage – 13 से 19 वर्ष) में धूम्रपान और शराब की आदतें न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, बल्कि भविष्य के लिए भी गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। किशोरावस्था में बच्चों के मस्तिष्क का विकास हो रहा होता है। जिसमें ‘लिम्बिक सिस्टम’ (जो भावनाओं और खुशी को नियंत्रित करता है) तो जल्दी विकसित हो जाता है, लेकिन मस्तिष्क का वह हिस्सा जिसे ‘प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स’ कहा जाता है (जो निर्णय लेने और आत्म-नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है) पूरी तरह विकसित नहीं होता। इसी कारण इस उम्र में बच्चे बिना जोखिम का आकलन किए रिस्क लेने के लिए तैयार हो जाते हैं।
किशोरावस्था के कुछ मुख्य पहलू और प्रभाव
1. आदत के मुख्य कारण
साथियों का दबाव (Peer Pressure): किशोर अपने दोस्तों के बीच जगह बनाने के लिए संघर्ष करते हैं। यदि ग्रुप में कोई धूम्रपान या शराब पीता है, तो वे भी “कूल” दिखने के लिए या ग्रुप से निकाले जाने के डर से नशे अपना लेते हैं। कोई भी बच्चा अकेले नशा शुरू नहीं करता; अक्सर दोस्तों में से ही कोई उसे प्रोत्साहित करता है और “मर्द” बनने वाली फीलिंग दिलाता है।
उत्सुकता: नई चीजों को आज़माने और उनके स्वाद या अनुभव को जानने की जिज्ञासा बच्चों को इस ओर ले जाती है।
तनाव और चिंता: पढ़ाई का दबाव, निजी जीवन के तनाव, प्रेम-संबंधों की उलझनें, करियर की चिंता या घर का कलहपूर्ण माहौल भी नशे की ओर धकेल सकता है।
मीडिया का प्रभाव: फिल्मों, गानों और विज्ञापनों में नशे को ‘ग्लेमराइज़’ (महिमामंडन) किया जाता है। बच्चे अपने रोल मॉडल (हीरो/सिंगर) की नकल करने की कोशिश करते हैं।
2. स्वास्थ्य पर प्रभाव
धूम्रपान: फेफड़ों की परिपक्वता में रुकावट, सांस फूलना, हृदय रोग का खतरा, निकोटीन की लत और एकाग्रता में कमी।
शराब: लीवर को नुकसान, शरीर का कमजोर विकास, निर्णय लेने की क्षमता में कमी और कमजोर याददाश्त।
शिक्षा: इन आदतों के कारण पढ़ाई का प्रदर्शन गिर जाता है और स्कूल/कॉलेज छोड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
3. व्यवहार में बदलाव
चिड़चिड़ापन, परिवार से झूठ बोलना और चोरी करने जैसी प्रवृत्तियां विकसित हो सकती हैं।
4. रोकथाम
खुली चर्चा (Open Debate): माता-पिता को बिना डराए-धमकाए बच्चों से इन विषयों पर बात करनी चाहिए। यह जानने की कोशिश करें कि उन्होंने यह क्यों और किसके कहने पर शुरू किया। उन्हें उदाहरणों के साथ इसके नुकसान समझाएं।
सही संगति: करियर और स्वास्थ्य के प्रति ईमानदार दोस्त चुनने में उनकी मदद करें। बच्चों की गतिविधियों और पार्टियों पर नज़र रखें, लेकिन उनके साथ दोस्ताना व्यवहार रखें। बहुत अधिक सख्ती बच्चों को बागी बना देती है।
शौक विकसित करें: खाली समय में खेलों, संगीत या कला की ओर प्रेरित करें। खुद एक रोल मॉडल बनें। यदि घर का कोई सदस्य नशा करता है, तो पहले उसे बंद करवाएं।
”ना” कहना सीखें: दबाव के आगे झुकने के बजाय आत्मविश्वास से “ना” कहना सबसे बड़ी जीत है।
किशोरावस्था के दौरान नशीले पदार्थों का सेवन मस्तिष्क की संरचना को स्थायी रूप से बदल सकता है, जिससे जीवनभर की लत लग सकती है। एक सर्वे के अनुसार, शराब पीने वाले 40% किशोरों के घर में कोई न कोई सदस्य शराब पीता था। वहीं, 46% धूम्रपान करने वाले बच्चों के घर में धूम्रपान का इतिहास रहा है। यदि घर के बड़े बच्चों के सामने नशा करते हैं, तो बच्चा इसे “पारिवारिक रिवाज” समझने लगता है।
नशा छुड़ाने के पारिवारिक उपाय
बच्चों को व्यस्त दिनचर्या में रखें और योग या ध्यान (Meditation) करवाएं। आहार में सात्विक चीजें जैसे ताजे फल, हरी सब्जियां, दूध, ड्राई फ्रूट और ग्रीन टी शामिल करें। तला हुआ और मसालेदार भोजन कम करें। मानसिक स्पष्टता और तनाव कम करने के लिए ब्राह्मी और अश्वगंधा का उपयोग किया जा सकता है। घबराहट और ‘विड्रॉल सिम्टम्स’ के लिए शंखपुष्पी और जटामासी असरदार होती हैं। परिवार का साथ और सही मार्गदर्शन ही बच्चे को सामान्य जीवन में वापस ला सकता है।
— डॉ. वरिंदर कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला