चंडीगढ़, 01 जनवरी 2026: पंजाब में एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिल रहा है। आम नागरिक अब खुद अपने मोबाइल से सरकारी योजनाओं की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। यह कोई सरकारी प्रचार नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है। हाल ही में आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने इंस्टाग्राम पर “सेहत-शिक्षा हॉस्पिटल” की तस्वीर डाली, जो तेजी से वायरल हो गई। पोस्ट के कैप्शन में लिखा था “मान सरकार, ये रही सिर्फ सुलतां खालदार!” यह तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि उस बदलाव की गवाही है जो मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार जमीन पर ला रही है।
असली बात यह है कि पंजाब सरकार ने शुरू से ही एक बात साफ कर दी थी विकास का मतलब सिर्फ बड़ी-बड़ी इमारतें या हाईवे नहीं, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतें हैं। सेहत और शिक्षा ये दो ऐसे स्तंभ हैं जिन पर किसी भी इंसान का पूरा जीवन टिका होता है। मान सरकार ने इसी फॉर्मूले को अपनाया और पूरी ताकत से इन दोनों क्षेत्रों में काम शुरू किया। नतीजा यह है कि आज पंजाब के गांव-गांव, शहर-शहर में लोग महसूस कर रहे हैं कि सरकार उनके लिए काम कर रही है, उनकी परवाह कर रही है।
सोशल मीडिया पर आ रही प्रतिक्रियाएं इस बात का सबूत हैं। एक यूजर ने लिखा – “पहली बार लग रहा है कि सरकार हमारे लिए है, न कि हम सरकार के लिए।” दूसरे ने कहा – “मोहल्ला क्लीनिक में मुफ्त इलाज मिलता है, दवाइयां मिलती हैं। पहले तो सोच भी नहीं सकते थे।” ये टिप्पणियां दिखाती हैं कि जनता ने मान सरकार के इरादों को समझ लिया है। लोग जानते हैं कि यह सरकार दिखावे की नहीं, बल्कि हकीकत में बदलाव लाने वाली है। जब आम आदमी खुद सरकार के काम की तारीफ करने लगे, तो समझ जाइए कि नीतियां सही दिशा में जा रही हैं।
पंजाब भर में फैले सैकड़ों मोहल्ला क्लीनिक इस बदलाव की पहली कड़ी हैं। गरीब से गरीब इंसान को अब इलाज के लिए प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। बुखार हो, दर्द हो या कोई छोटी-मोटी बीमारी मोहल्ले में ही सुविधा मिल जाती है। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों का कायाकल्प किया जा रहा है। जर्जर इमारतों की मरम्मत, नई मशीनें, साफ-सफाई, डॉक्टरों की नियुक्ति हर स्तर पर काम हो रहा है। यह सब इसलिए क्योंकि मान सरकार का मानना है कि स्वस्थ नागरिक ही मजबूत पंजाब बना सकते हैं।
शिक्षा के मोर्चे पर भी यही कहानी है। सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ रही है क्योंकि अब वहां भी प्राइवेट स्कूलों जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। कमरों की मरम्मत, स्मार्ट क्लासरूम, खेल के मैदान, शौचालय सब कुछ दुरुस्त किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी पूरी की जा रही है। ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ जैसी योजनाओं से गरीब बच्चों को भी अच्छी शिक्षा का मौका मिल रहा है।
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