नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा मामले में Mulla Afroz की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने हिरासत को गैरकानूनी माना और उत्तर प्रदेश सरकार पर ₹10 लाख का खर्च लगाने का आदेश दिया।
यह मामला नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा से जुड़ा है। उस समय जामा मस्जिद के कोर्ट-निर्देशित सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी।
Mulla Afroz को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में उन्हें NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जून 2026 में इस हिरासत को बरकरार रखा था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NSA जैसी preventive detention की कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किए गए आधार पर्याप्त नहीं थे। अदालत के सामने पुलिस हिरासत के दौरान दिए गए एक कथित extra-judicial confession का भी मुद्दा था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस आधार को preventive detention के लिए पर्याप्त नहीं माना और इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी अलग कर दिया।
₹10 लाख का खर्च क्यों लगाया गया?
अदालत ने माना कि हिरासत की प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं थी। इसी वजह से उत्तर प्रदेश सरकार पर Rs 10 लाख का खर्च लगाया गया है।
यह फैसला preventive detention के इस्तेमाल और उसके लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवालों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
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