पंजाब में दुर्घटना, गंभीर बीमारी और अन्य मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने अपने आपातकालीन एम्बुलेंस नेटवर्क का विस्तार किया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के आपातकालीन एम्बुलेंस बेड़े में अब कुल 371 एम्बुलेंस शामिल हैं।
इन एम्बुलेंसों को राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तैनात किया गया है। जरूरत पड़ने पर 108 और 112 हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा प्राप्त की जा सकती है।
आपातकालीन कॉल मिलने के बाद कंट्रोल रूम, जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, एम्बुलेंस स्टाफ, पैरामेडिक्स और संबंधित अस्पताल के बीच समन्वय के आधार पर मरीज तक सहायता पहुंचाई जाती है। इसका उद्देश्य दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में मरीज को जल्द से जल्द प्राथमिक सहायता देना और उचित अस्पताल तक पहुंचाना है।
एम्बुलेंसों में ऑक्सीजन की सुविधा, एम्बु-बैग, जीवन रक्षक दवाएं और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग सिस्टम उपलब्ध हैं। इससे कंट्रोल रूम को एम्बुलेंस की स्थिति की जानकारी मिलती रहती है और जरूरत के अनुसार नजदीकी उपलब्ध वाहन को मरीज तक भेजा जा सकता है।
पंजाब सरकार के अनुसार, एम्बुलेंस सेवा का औसत रिस्पॉन्स टाइम शहरी क्षेत्रों में करीब 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 20 मिनट है। सरकार का लक्ष्य इस समय को और कम करके 10 मिनट तक लाना है।
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में रिस्पॉन्स टाइम महत्वपूर्ण होता है, खासकर सड़क दुर्घटनाओं, हृदय संबंधी आपात स्थिति और अन्य गंभीर मामलों में। सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती समय को अक्सर ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। इस दौरान घायल व्यक्ति को समय पर प्राथमिक चिकित्सा और अस्पताल तक पहुंचाने से इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है।
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार, एम्बुलेंस बेड़े में नई जोड़ी गई गाड़ियों में 7 ‘चाइल्ड मेमोरियल एम्बुलेंस’ भी शामिल हैं। इन्हें पटियाला जिले के समाना में एक सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले बच्चों की स्मृति को समर्पित किया गया है।
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