सहरसा/पटना, 15 अक्टूबर 2026। बिहार में विधान परिषद चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (BJP), जनता दल यूनाइटेड (JDU) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पर निशाना साधा है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे चुनाव के जरिए सत्ता में बैठे लोगों को जवाबदेह बनाएं।
15 अक्टूबर की शाम प्रकाशित टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सहरसा में एक कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर कार्रवाई की। यह प्रशांत किशोर का आरोप है; रिपोर्ट में इसे किसी स्वतंत्र जांच से साबित तथ्य के रूप में पेश नहीं किया गया है।
MLC चुनाव को लेकर प्रशांत किशोर ने क्या कहा?
बिहार में 23 अक्टूबर को विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं।
प्रशांत किशोर ने कहा कि केवल सड़कों पर प्रदर्शन करने से बदलाव नहीं आएगा। उनके मुताबिक, मतदाताओं को चुनाव के दौरान अपने वोट का इस्तेमाल करके सरकार से जवाब मांगना चाहिए।
उन्होंने BJP, JDU और NDA के खिलाफ मतदान करने की अपील की। इस बयान को आगामी विधान परिषद चुनाव से पहले जन सुराज की राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार सरकार की कानून-व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने बिहार में हाल की आपराधिक घटनाओं का जिक्र करते हुए राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए।
उन्होंने भोजपुर में एक सेवानिवृत्त कस्टम अधिकारी और नालंदा में एक पुलिसकर्मी की हत्या की घटनाओं का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस शराब और बालू माफिया पर कार्रवाई के बजाय दूसरे मामलों में अधिक सक्रिय दिखाई देती है।
उन्होंने पुलिस मुठभेड़ों को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि किसी व्यक्ति का अपराध तय करना और सजा देना न्यायिक प्रक्रिया का काम है।
ये बयान राज्य में अपराध नियंत्रण और पुलिस की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस को आगे बढ़ाते हैं। हालांकि, सरकार और पुलिस का पक्ष तथा संबंधित मामलों की जांच की स्थिति अलग से देखना जरूरी है।
वैशाली नाव हादसे पर भी सरकार को घेरा
वैशाली जिले के राघोपुर इलाके में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत के बाद प्रशांत किशोर ने बचाव व्यवस्था पर सवाल उठाए।
उन्होंने पूछा कि हादसे के समय बचाव दल की मौजूदगी और व्यवस्था कैसी थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने नावों की सुरक्षा जांच और SDRF की तैनाती जैसे कदमों की घोषणा की है।
नाव हादसे का मुद्दा अब केवल सुरक्षा और प्रशासन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्षी नेताओं ने इसे सरकार की जवाबदेही से भी जोड़ा है।
23 अक्टूबर का चुनाव क्यों अहम है?
बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों के लिए होने वाला चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें शिक्षक, स्नातक और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं।
जन सुराज शिक्षा, रोजगार और पलायन जैसे मुद्दों को उठाती रही है। वहीं, NDA के लिए सहयोगी दलों के बीच तालमेल और उम्मीदवारों के पक्ष में समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण होगा।
इन चुनावों का परिणाम विधानसभा में सरकार बदलने का सीधा फैसला नहीं करेगा, लेकिन इससे राजनीतिक दलों के संगठन, समर्थन और चुनावी मुद्दों को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
आगे क्या?
23 अक्टूबर के मतदान से पहले बिहार में राजनीतिक बयानबाजी तेज रहने की संभावना है। जन सुराज जहां सरकार की जवाबदेही, कानून-व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया के सवाल उठा रही है, वहीं चुनाव के नतीजे बताएंगे कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं का रुख क्या रहा।