बिहार MLC चुनाव से पहले NDA में अंदरूनी खींचतान, JDU और RLM के नेताओं की बगावत से बढ़ी चुनौती

by Priya
cm samrat

पटना, 15 अक्टूबर 2026। बिहार में 23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर उम्मीदवारों को लेकर खींचतान सामने आई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अनंत सिंह ने अपनी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के मुकाबले जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया है। वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में भी पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ उतरे नेता को लेकर विवाद सामने आया है।

इन घटनाओं ने आठ सीटों पर होने वाले विधान परिषद चुनाव से पहले NDA के सामने अपने सहयोगी दलों और नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती खड़ी कर दी है।

JDU में नीरज कुमार और अनुज सिंह के बीच मुकाबला

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में JDU के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार चुनाव मैदान में हैं। उनके सामने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह हैं।

इस मुकाबले में राजनीतिक हलचल तब बढ़ी, जब मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह ने अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करने का ऐलान किया। अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद रहे हैं।

अनंत सिंह का यह कदम पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के समर्थन में एकजुटता बनाए रखने की JDU की कोशिशों के लिए चुनौती बन गया है। पार्टी नेतृत्व ने गठबंधन के उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने वाले नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

RLM में बगावत, निर्दलीय उम्मीदवार पर कार्रवाई

NDA की दूसरी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा में भी उम्मीदवार को लेकर विवाद हुआ है। पार्टी के महासचिव राम पुकार सिन्हा ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इस सीट पर NDA ने JDU के आनंद पुष्कर को अपना उम्मीदवार बनाया है।

इसके बाद RLM ने राम पुकार सिन्हा को छह साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया। पार्टी ने उनके फैसले को अनुशासनहीनता बताया।

हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार RLM के तीन विधायक—माधव आनंद, आलोक कुमार सिंह और रामेश्वर महतो—राम पुकार सिन्हा के समर्थन में दिखाई दिए। इससे पार्टी के भीतर मतभेद की स्थिति सामने आई है।

सम्राट चौधरी ने NDA नेताओं को क्या संदेश दिया था?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में 9 अक्टूबर को NDA विधानमंडल दल की बैठक हुई थी। बैठक में गठबंधन के नेताओं से सभी आठ विधान परिषद सीटों पर उम्मीदवारों की जीत के लिए मिलकर काम करने की अपील की गई थी।

बैठक में मतों के बंटवारे को रोकने और चुनाव प्रचार तेज करने पर जोर दिया गया। इसके बावजूद JDU और RLM से जुड़े विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुए।

NDA के नेताओं ने गठबंधन के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार करने वालों पर कार्रवाई की बात कही थी।

23 अक्टूबर का चुनाव क्यों महत्वपूर्ण है?

बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए होने वाला चुनाव स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में हो रहा है। इन सीटों पर संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं।

इस चुनाव में उम्मीदवारों के बीच मुकाबले के साथ-साथ राजनीतिक दलों की आंतरिक एकजुटता भी चर्चा का विषय बनी हुई है। आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ अपने ही सहयोगी दलों के नेताओं का प्रचार करना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, इन विवादों के आधार पर चुनाव के नतीजों का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। अंतिम परिणाम मतदाताओं के रुख और मतदान पर निर्भर करेंगे।

आगे क्या होगा?

23 अक्टूबर के मतदान से पहले NDA के सामने अपने उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार तेज करने और सहयोगी दलों के भीतर असंतोष को संभालने की चुनौती है। JDU और RLM के नेतृत्व की अगली कार्रवाई पर भी नजर रहेगी।

विपक्षी और अन्य दलों के उम्मीदवारों के लिए यह मुकाबला अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने का अवसर है। चुनाव के नतीजे बताएंगे कि इन आंतरिक मतभेदों का संबंधित सीटों पर कितना असर पड़ा।

 

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