पीएम मोदी ने सेवा ज्योति कार्यक्रम को किया संबोधित, बोले- हर संकट मेरे धैर्य की परीक्षा’

by Manu
पीएम मोदी सेवा ज्योति कार्यक्रम

दिल्ली, 07 अक्टूबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनसेवा में अपने 25 साल पूरे होने के मौके पर सेवा ज्योति कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि सात अक्टूबर 2001 को जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी तब मैंने सोचा भी नहीं था कि यह मुकाम भी आएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो केवल कृतज्ञता का भाव ही नजर आता है। मैं कृतज्ञ हूं हर उस व्यक्ति हर उस घटना के प्रति जिसने मुझे कुछ न कुछ सिखाया है। जिसने मुझे जिताया मुझे विनम्र होना सिखाया। जिसने मुझे गिराया मुझे फिर खड़ा होना सिखाया। शुभचिंतकों ने मुझे प्रोत्साहित किया और आलोचकों ने मुझे अपने भीतर झांकना सिखाया। जिसने मेरा साथ दिया मुझे विश्वास की शक्ति दिखाई। जिसने मेरा विरोध किया मुझे लोकतंत्र की शक्ति समझाई। हर संकट मेरे धैर्य की परीक्षा रहा। हर सफलता ने मेरे दायित्व को विस्तार दिया। हर सिद्धि ने बड़े लक्ष्यों की तरफ बढ़ने का साहस और जज्बा दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि लाल किले से मैंने सबका प्रयास की बात की थी। भारत को नई बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए जो जोश और जज्बा चाहिए वो एक ही संदेश देता है कि हम करके रहेंगे। 2047 में देश विकसित होगा।

सेवा ज्योति कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनता ने हमेशा मुझे अपनी सेवा के लिए चुना। आज भारत के लोकतंत्र और संविधान का वंदन करता हूं। हृदय से अभिनंदन करता हूं। आज सुबह श्री विनायक मंदिर में दर्शन के लिए गया था। मैंने प्रार्थना की 140 करोड़ जनता के लिए और अपने लिए भी प्रार्थना की। मैंने प्रार्थना की कि मुझे इतनी शक्ति और सामर्थ्य दें कि मैं अपने देश के लिए और अधिक ऊर्जा से काम कर सकूं। दिन-रात देशवासियों की सेवा कर सकूं। लाखों-करोड़ों देशवासियों और लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम मेरी सबसे बड़ी शक्ति है। देश के हर नागरिक का मुझ पर सबसे बड़ा हक है।

कार्यकाल के दौरान कई सारे चुनाव हुए। चाहे वो विधानसभा के चुनाव हों या लोकसभा के चुनाव जनता ने हमेशा मुझे अपनी सेवा के लिए चुना। मैं आज भारत के लोकतंत्र का भारत के संविधान का भी वंदन करता हूं। मैं सेवा ज्योति यात्रा में भाग लेने वाले सभी नागरिकों का भी अभिनंदन करता हूं। आज मैं जो कुछ हूं जहां भी हूं जिस दायित्व पर हूं उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता-जनार्दन का ही है। मेरे लिए जनता-जनार्दन ईश्वर का ही रूप है। लाखों-करोड़ों देशवासियों के विश्वास और लाखों कार्यकर्ताओं का परिश्रम ही मेरी सबसे बड़ी शक्ति रही है।

देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है। इसलिए देश के लिए मेरा दायित्व भी सबसे अधिक है। मैं हृदय से ये मानता हूं कि देश के हर नागरिक का मुझपर सबसे बड़ा हक है। ये 25 वर्ष का जन विश्वास ये 25 वर्षों का अनुभव बहुत बड़ी पूंजी है। ये पूंजी सिर्फ मोदी की नहीं है। ये पूंजी देश की है। मां भारती की हर संतान इस पूंजी की अधिकारी है।

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