पटना, 28 सितंबर 2026। बिहार की राजधानी पटना में सोमवार को विभिन्न मांगों को लेकर हुए छात्र, किसान और मजदूर संगठनों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई। गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च डाकबंगला चौराहे तक पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड हटाने की कोशिश के बाद पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और बाद में लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई छात्र-छात्राओं के घायल होने और कुछ के बेहोश होने की जानकारी सामने आई है।
नर्सिंग और पारा मेडिकल छात्रों की प्रमुख मांग
प्रदर्शन में बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़े नर्सिंग और पारा मेडिकल छात्र भी शामिल थे। छात्रों की प्रमुख मांगों में विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाना शामिल था। प्रदर्शनकारियों का दावा था कि बड़ी संख्या में छात्रों के परीक्षा परिणाम प्रभावित हुए हैं।
डाकबंगला चौराहे पर बढ़ा तनाव
दोपहर के समय प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने वाटर कैनन चलाया। स्थिति नहीं संभलने पर लाठीचार्ज किया गया। पुलिस कार्रवाई के दौरान कई छात्र-छात्राएं सड़क पर गिर गए और कुछ को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस अधिकारी को भी लगा पत्थर
प्रदर्शन के दौरान भीड़ की ओर से पत्थर फेंके जाने की भी बात सामने आई। एक पत्थर पटना ग्रामीण एसपी कमल मीणा के हेलमेट पर लगा। एक महिला पत्रकार के घायल होने की भी जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाया और कई लोगों को हिरासत में लिया।
11 सूत्री मांगों को लेकर था प्रदर्शन
प्रदर्शनकारी संगठनों की मांगों में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत और मुआवजा, बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा नीति, श्रम कानून, कृषि ऋण माफी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल थे।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद शाम तक डाकबंगला चौराहे को खाली करा लिया गया। पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
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