पटना, 22 सितंबर 2026: बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान पटना ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों में अधिकारियों को मानदेय भुगतान से संबंधित प्रसारित खबर के संदर्भ में स्पष्ट किया है कि उक्त खबर में संस्थान की प्रशिक्षण व्यवस्था तथा मानदेय भुगतान की निर्धारित प्रक्रिया को समग्र एवं सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
BIPARD विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों एवं अन्य प्रशिक्षणार्थियों के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य प्रशिक्षणार्थियों को प्रशासनिक कार्यप्रणाली सरकारी नियमों एवं प्रक्रियाओं तथा क्षेत्रीय प्रशासन से संबंधित व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है। इसी उद्देश्य से अनुभवी सरकारी पदाधिकारियों तथा आवश्यकता के अनुसार गैर-सरकारी विशेषज्ञों को प्रशिक्षण सत्र लेने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
प्रशिक्षकों को मानदेय का भुगतान उनके द्वारा वास्तव में लिए गए प्रशिक्षण सत्रों के आधार पर किया जाता है। मानदेय की दरें पूर्व निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं। संबंधित प्रशिक्षक की पात्रता पद तथा लिए गए सत्रों की संख्या के आधार पर देय मानदेय तय होता है। भुगतान ऑनलाइन माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया के तहत होता है।
BIPARD का कहना है कि बिना प्रशिक्षण सत्र लिए अथवा वास्तविक सत्रों से अधिक संख्या के आधार पर मानदेय भुगतान की कोई व्यवस्था नहीं है। भुगतान संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम के अभिलेखों के आधार पर किया जाता है।
वर्ष 2023 से 2025 के बीच आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण उपलब्ध है। इसमें प्रशिक्षकों द्वारा लिए गए सत्र तथा उनके अनुरूप किए गए मानदेय भुगतान का रिकॉर्ड संधारित है। अभिलेखों से सत्यापित किया जा सकता है कि किस प्रशिक्षक ने कितने सत्र लिए और कितना मानदेय मिला।
संस्थान ने कहा कि प्रशासनिक विषयों में अनुभवी सरकारी अधिकारियों की विशेषज्ञता का उपयोग प्रशिक्षणार्थियों को वास्तविक कार्यानुभव से परिचित कराने के लिए किया जाता है। व्यक्तित्व विकास संचार कौशल जैसे विषयों के लिए गैर-सरकारी विशेषज्ञों की सेवाएं भी ली जाती हैं।
BIPARD का दावा है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन तथा मानदेय भुगतान की प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप संचालित होती है। किसी अधिकारी या प्रशिक्षक को वास्तविक सत्रों से अधिक के आधार पर भुगतान किए जाने का कोई तथ्य अभिलेखों से परिलक्षित नहीं होता।
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