जिनेवा/वॉशिंगटन, 15 अक्टूबर 2026। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी युद्ध और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बढ़ते राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक कारोबार पर लंबे समय तक रह सकता है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) की प्रमुख नगोजी ओकोंजो-इवेला ने चेतावनी दी है कि युद्ध और व्यापारिक रुकावटों के कारण कंपनियां अब अपने सामान की खरीद, उत्पादन और सप्लाई के रास्ते बदल रही हैं। इनमें से कई बदलाव भविष्य में भी जारी रह सकते हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, WTO प्रमुख ने यह बात अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों के दौरान कही। उनके मुताबिक, युद्ध खत्म होने के बाद भी दुनिया के व्यापार को पहले जैसी स्थिति में लौटने में समय लग सकता है।
मध्य पूर्व के कारोबार पर कितना असर?
WTO के अनुमान के मुताबिक, ईरान युद्ध के कारण इस साल मध्य पूर्व के देशों के export में करीब 17 प्रतिशत और import में लगभग 15 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
यहां export का मतलब दूसरे देशों को सामान बेचना और import का मतलब विदेशों से सामान खरीदना है। जब युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही, माल की ढुलाई और व्यापारिक रास्तों में रुकावट आती है, तो सामान पहुंचाने में देरी होती है और लागत भी बढ़ जाती है।
इसका असर केवल युद्ध प्रभावित देशों तक सीमित नहीं रहता। जिन देशों की कंपनियां वहां से कच्चा माल या अन्य जरूरी सामान खरीदती हैं, उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनियां क्यों बदल रही हैं व्यापार के रास्ते?
युद्ध और व्यापारिक तनाव ने कंपनियों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वे सामान के लिए किसी एक देश या रास्ते पर पूरी तरह निर्भर न रहें।
अब कई कंपनियां दूसरे देशों से सामान खरीदने, नए सप्लायर तलाशने और वैकल्पिक समुद्री या परिवहन मार्गों का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही हैं। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने पर कारोबार को पूरी तरह रुकने से बचाया जा सकता है।
हालांकि, नए रास्तों से सामान पहुंचाना कई बार महंगा पड़ता है। इसके बावजूद कंपनियां भविष्य में होने वाले नुकसान से बचने के लिए ऐसे विकल्पों को बनाए रख सकती हैं।
AI से बढ़ रहा व्यापार, लेकिन जोखिम अभी भी बरकरार
WTO ने 2026 में दुनिया के सामान के व्यापार में वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 3.9 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले मार्च में संगठन ने 1.9 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।
इस बढ़ोतरी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उत्पादों की मांग एक अहम वजह है। AI तकनीक के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और दूसरे उत्पादों की मांग से वैश्विक व्यापार को सहारा मिल रहा है।
लेकिन WTO प्रमुख ने आगाह किया कि AI से जुड़ी बढ़ती मांग के कारण व्यापार की तस्वीर जरूरत से ज्यादा सकारात्मक दिखाई दे सकती है। युद्ध, नए शुल्क और सप्लाई में रुकावटें अब भी वैश्विक कारोबार के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।
अफ्रीकी देशों के बीच व्यापार बढ़ाने पर भी जोर
WTO प्रमुख ने यह भी कहा कि अफ्रीकी देश आपस में व्यापार बढ़ाकर रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
उनके अनुसार, अफ्रीका के कुल व्यापार में महाद्वीप के देशों के बीच होने वाले कारोबार की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है। इसके मुकाबले यूरोपीय संघ के भीतर सदस्य देशों के बीच व्यापार की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है।
इस अंतर से पता चलता है कि अफ्रीकी देशों के पास आपसी कारोबार बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। क्षेत्रीय व्यापार समझौते और नए व्यापारिक संबंध इस दिशा में मददगार हो सकते हैं।
आम लोगों पर क्या पड़ सकता है असर?
वैश्विक व्यापार में लंबे समय तक रुकावट रहने पर ईंधन, खाद, कच्चे माल और दूसरी जरूरी चीजों की ढुलाई महंगी हो सकती है। इसका असर उत्पादन की लागत और कुछ उत्पादों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि युद्ध कितने समय तक चलता है, व्यापारिक रास्ते कितने प्रभावित होते हैं और कंपनियां कितनी जल्दी दूसरे विकल्प अपनाती हैं।
कुल मिलाकर, WTO की चेतावनी बताती है कि युद्ध का असर केवल प्रभावित देशों की अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता। इससे दुनिया भर की कंपनियों की कारोबारी रणनीति बदल सकती है और वैश्विक व्यापार के पुराने रास्तों की जगह नए रास्ते ले सकते हैं।
ये भी देखें: दुनिया की अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक कारोबार से जुड़ी अन्य खबरें।