पटना, 7 अक्टूबर 2026। बिहार में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। INDIA ब्लॉक की ओर से आज राज्यभर में ‘आक्रोश मार्च’ निकाला जा रहा है। विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में हुए बदलाव और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
RJD नेता तेजस्वी यादव ने इस आंदोलन का ऐलान करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल हैं।
पहले समझिए क्या है SIR?
SIR यानी Special Intensive Revision, मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है। इसका उद्देश्य electoral roll को दोबारा verify करना है, ताकि योग्य मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और मृत, स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके, duplicate या अयोग्य entries को हटाया जा सके।
बिहार में मौजूदा SIR की शुरुआत 24 जून 2025 को हुई थी। इसमें 1 जुलाई 2025 को qualifying date माना गया था। ECI के मुताबिक इससे पहले बिहार में intensive revision वर्ष 2003 में हुआ था।
इस प्रक्रिया में Booth Level Officers यानी BLOs ने घर-घर जाकर enumeration forms और मतदाताओं से संबंधित जानकारी जुटाई। जिन लोगों की eligibility को लेकर अतिरिक्त verification की जरूरत थी, उनके लिए दस्तावेज और claims-objections की व्यवस्था भी की गई थी।
SIR के बाद कितने बदले वोटर?
24 जून 2025 को बिहार की electoral roll में करीब 7.89 करोड़ electors थे। 1 अगस्त 2025 को प्रकाशित draft roll में यह संख्या करीब 7.24 करोड़ रह गई।
ECI के अनुसार draft stage पर करीब 65 लाख entries हटाई गईं। इसके बाद claims और objections की प्रक्रिया में 21.53 लाख eligible electors जोड़े गए, जबकि 3.66 लाख entries को फिर हटाया गया। 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित final electoral roll में करीब 7.42 करोड़ electors शामिल थे।
विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?
INDIA ब्लॉक का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए गए और genuine voters के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष चुनाव आयोग से प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और प्रभावित मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग कर रहा है।
तेजस्वी यादव ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं और CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है। INDIA ब्लॉक ने 7 अक्टूबर को प्रखंड स्तर पर ‘आक्रोश मार्च’ और 8 अक्टूबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन तथा पटना में लोकभवन की ओर मार्च का कार्यक्रम घोषित किया है।
चुनावी राजनीति में SIR बना बड़ा मुद्दा
बिहार में SIR का विवाद अब केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहा है। यह राज्य की राजनीति में एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे मताधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ रहा है, जबकि चुनाव आयोग का पक्ष electoral roll को अधिक accurate और updated बनाने पर केंद्रित है।
इसलिए 7 अक्टूबर का आक्रोश मार्च बिहार की चुनावी राजनीति में SIR को लेकर विपक्ष की आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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