नई दिल्ली, 29 सितंबर 2026: भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर 96.1450 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। यह करीब दो महीने का निचला स्तर है। रुपये पर महंगे कच्चे तेल और वैश्विक बाजार में बढ़ी चिंता का दबाव देखने को मिला।
रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को रुपया करीब 0.2 प्रतिशत कमजोर हुआ और 96 रुपये प्रति डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गया।
महंगा तेल बना बड़ा कारण
रुपये पर दबाव बढ़ने का एक बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। Brent crude की कीमत करीब 1.5 प्रतिशत बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
विदेशी निवेश भी बना दबाव
सितंबर में विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजारों से करीब 3.7 अरब डॉलर की निकासी की जानकारी सामने आई है। इससे भी रुपये पर दबाव बढ़ा है।
रुपये की कमजोरी का असर आयात लागत पर पड़ सकता है। खासकर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे डॉलर में खरीदे जाने वाले सामान महंगे हो सकते हैं।
हालांकि रुपये की विनिमय दर कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करती है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत, विदेशी पूंजी का प्रवाह और वैश्विक बाजार की स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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