लखनऊ, 19 सितंबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में अखिलेश और शिवपाल यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पहले नौकरियों में डकैती डालने के लिए चाचा-भतीजे की जोड़ी बेखौफ निकल पड़ती थी। आज उपदेश की भूमिका में हैं। 2027 के बाद उपदेशक भी नहीं रह पाएंगे।
सीएम ने कहा कि पहले बिना परीक्षा दिए ही नौकरी मिल जाती थी। पहले विज्ञापन जारी होते ही ठेके बांट दिए जाते थे और धंधा शुरू हो जाता था। जिन्होंने 2017 से पहले नियुक्ति पत्र वितरण में गदर मचाई थी वे नोट कर लें कि अगले छह महीने में एक लाख से अधिक नौजवानों को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। वे गिनते रहें हम नौकरियां देते जाएंगे।
सीएम ने लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के 818 अभ्यर्थियों को जॉइनिंग लेटर बांटे। सीएम ने कहा कि 2017 से पहले यूपीपीएससी का चेयरमैन ऐसे व्यक्ति को बनाया गया जो खुद योग्य नहीं था। चेयरमैन बनने के बाद उसने गदर मचाई। इसके चलते युवाओं को सड़क पर उतरना पड़ा। कोर्ट ने कहा कि उसे जेल भेजो जिंदगी भर सड़ाओ।
सीएम ने कहा कि भर्ती बोर्ड और आयोगों में भाई-भतीजों को बैठाकर भर्ती प्रक्रिया को बदनाम कर दिया गया था। एक भी भर्ती ईमानदारी से नहीं होती थी। अब भर्ती बोर्ड और आयोग शासन की किसी राजनीति का शिकार नहीं होते हैं। अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को जॉइनिंग लेटर बांटे जा चुके हैं।
2017 से पहले यूपी की धारणा क्या थी। हर दूसरे दिन दंगा होता था और महीनों तक कर्फ्यू रहता था। युवा के सामने एक ओर कुआं और दूसरी ओर खाई थी। यूपी में नौकरी नहीं थी। किसी भी युवा के लिए यह स्थिति भयावह थी। इससे उसके सपने टूटते थे। हमने ग्रुप सी और डी की भर्तियों में इंटरव्यू की व्यवस्था ही खत्म कर दी। पहले ऐसी कई भर्तियां हुईं जिनमें जिन लोगों ने आवेदन नहीं किया था उन्हें भी नियुक्ति पत्र बांट दिए गए। यह अराजकता की पराकाष्ठा थी।
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