महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक अबू आसिम आज़मी को निलंबित किए जाने के एक दिन बाद, भाजपा नेता हरिभूषण बचोल ने औरंगाबाद का नाम बदलकर राम नगर करने की मांग की है। बचोल ने राज्य के औरंगाबाद सहित उन 12 स्थानों के नाम बदलने की भी मांग की है, जिनके नाम औरंगजेब के नाम पर रखे गए थे। उन्होंने इन स्थानों के नाम बदलकर सनातन नेताओं के नाम पर रखने की वकालत की।
इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है और विभिन्न दलों के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हो रही है। जहां भाजपा इस मुद्दे को लेकर सक्रिय है, वहीं विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे अकादमिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता जताई है।
जेडी(यू) एमएलसी खालिद अनवर का भी इस मामले पर बयान आया है
जेडी(यू) एमएलसी खालिद अनवर ने इस पर अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि औरंगजेब के बारे में लोगों की अलग-अलग राय है। इतिहासकारों ने कहा है कि औरंगजेब एक अच्छा शासक था और वह उतना क्रूर नहीं था, जितना उसे चित्रित किया जाता है; एक लॉबी है जो उसे क्रूर के रूप में चित्रित करने की कोशिश कर रही है। यह एक अकादमिक चर्चा है, और इस पर संसद के पटल या राजनीतिक रैली में चर्चा नहीं की जा सकती। इसलिए, अकादमिक चर्चा को अकादमिक ही रहने देना चाहिए। मुझे समझ में नहीं आता कि औरंगजेब के खिलाफ इस तरह की गलत सूचना के जरिए कोई राजनीतिक दल क्या हासिल करना चाहता है।
योगी ने भी बोला हमला
इसके जवाब में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने औरंगजेब को लेकर समाजवादी पार्टी और अबू आज़मी पर जमकर हमला बोला। योगी ने कहा, “समाजवादी पार्टी हमें (अबू आजमी) कंभक्त को निकालो पार्टी से, यूपी भेज दो, बाकी इलाज हम अपने आप करवा लेंगे।”
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब अबू आज़मी ने औरंगजेब को “क्रूर प्रशासक” नहीं मानते हुए यह बयान दिया था कि उसने “कई मंदिर बनवाए” और उसकी और छत्रपति संभाजी महाराज के बीच लड़ाई राज्य प्रशासन के मुद्दे पर थी, न कि हिंदू-मुस्लिम के बीच।
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