पंजाबी यूनिवर्सिटी में साहित्य उत्सव का दूसरा दिन
पटियाला, 20 फरवरी : पंजाबी यूनिवर्सिटी में पंजाबी विभाग की साहित्य सभा की तरफ से यूनिवर्सिटी के भाषाओं के साथ सम्बन्धित विभागों और भाषा विभाग पंजाब के सहयोग के साथ करवाए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय मातृ- भाषा दिवस को समर्पित पांच दिवसीय साहित्य उत्सव- 2025 के दूसरे दिन हुए दो अकादमिक सैशन हुए और इस उपरांत दो अलग रंग की गायन पेशकारियां हुई। दोनों अकादमिक सैशनों में विद्वानों की तरफ से पंजाब को समझने के हवाले के साथ बात की गई। पहले सैशन पंजाब को समझते- 1 के अंतर्गत प्रसिद्ध लेखक अमनदीप संधू और अनुवादक और चिंतक यादविन्दर सिंह के साथ पंजाबी विभाग के मुखी प्रो. गुरमुख सिंह की तरफ से संवाद रचाया गया। लेखक अमनदीप संधू ने अपनी सृजन प्रक्रिया के हवाले के साथ बात करते कहा कि इतिहास में पंजाब ने अपने ऊपर बहुत सारे संकट सहन किए। उन्होंने कहा कि पंजाबीयत के खासे में नाबरपुणा एक केंद्रीय सूत्र है तथा ऐसे ही इसकी खूबसूरती है।
पंजाबी यूनिवर्सिटी में करवाया गया बलराज साहनी यादगारी भाषण
पंजाबी यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग की तरफ से दूसरा सालाना बलराज साहनी यादगारी भाषण करवाया गया। प्रगतिशील लेखक लहर विषय बारे यह भाषण प्रसिद्ध लेखक और अनुवादक डा. रखशंदा जलाल की तरफ से दिया गया। डा. रखशंदा जलील ने प्रगतिशील शब्द की बदलतीं परिभाषाओं पर विचार-विमर्श करते इस बारे विषय पर विस्तार में प्रकाश डाला। उन्होंने प्रगतिशील लेखक संघ, प्रगतिशील लेखक आंदोलन और इंडियन पीपलज थिएटर एसोसिएशन की ऐतिहासिक विरासत के हवाले के साथ बात करते इन संस्थानों के योगदान बारे चर्चा की और विषय बारे अहम नुक्ते सामने लाए। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि हमें समकालीन समय के लिए इस अमीर विरासत को संभाल कर भी रखना चाहिए और आगे भी चलाना चाहिए।
पंजाबी यूनिवर्सिटी में साहित्य उत्सव का दूसरा दिन
पंजाबी यूनिवर्सिटी में करवाया गया बलराज साहनी यादगारी भाषण
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