भाषा विभाग पंजाब की तरफ से 1.18 लाख दुर्लभ पुस्तकों की डिजीटाईजेशन का कार्य आरंभ
पटियाला, 10 जनवरी : भाषा विभाग पंजाब की तरफ से बड़े प्रयास के अंतर्गत विभाग की हवाला लाइब्रेरी में मौजूद 1.18 लाख के करीब अलग- अलग भाषाओं की दुर्लभ और उच्च पुस्तकों को डिजिटल रूप में संभालने का कार्य आज आरंभ कर दिया गया है, जिनमें 68 हजार के करीब गुरमुखी लिपी (पंजाबी) वाली पुस्तकें शामिल हैं। इसके अलावा हिंदी, उर्दू, संस्कृत और अंग्रेजी की पुस्तकें भी इस कार्य में शामिल की जाएंगी। पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी के सहयोग के साथ शुरू किये इस प्रोजैक्ट की शुरुआत भाषा विभाग के डायरैक्टर जसवंत सिंह जफर की तरफ से टीम को शुभ कामनाएं देने के साथ हुई। इस मौके पंजाब डिजिटल लाइब्रेरी के चेयरमैन स. दविन्दरपाल सिंह विशेष के तौर पर उपस्थित हुए।
इस मौके जसवंत सिंह जफर ने बताया कि यह कार्य दो उद्देश्यों के अंतर्गत आरंभ किया गया है। पहला भाषा विभाग पंजाब के पास मौजूद बहुमूल्य साहित्यक विरासत को संभालना है। दूसरा उद्देश्य पंजाबी भाषा को मशीनी बुद्धिमानी के क्षेत्र में स्थापित करना है। डिजीटाईजेशन के कार्य तहत अलग- अलग भाषाओं में तीन सौ साल से पुरानी हाथ लिखतें, पुरातन ग्रंथ, सिख गुरु साहिबानों का समकाली साहित्य, विश्व कलासिक साहित्य, भाषा विभाग के रसोलों के विशेष अंक, पुराने नक्शे व अन्य बहुत सोरी बहुमूल्य लिखतें डिजीटल रूप में उपलब्ध हो जाएंगी। ऐसी दुलर्भ कृत्यों में 20 हजार के करीब ऐसी पुस्तकें शामिल हें, िजनकी सिर्फ एक एक कापी ही विभाग के पास मौजूद है। पुरातन 542 हाथ लिखतों को देखने के लिए अकसर ही खोजार्थी व श्रद्धामूलक बिरती वाले लोग विभाग में आते रहते हें, जिसके कारण पुरातन हाथ लिखतों को खास तौर पर नुकसान पहुंचने का डर रहता था लेकिन अब इन लिखतों को डिजीटल रूप में देखने की सुविधा मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि यह कार्य जहां दुनिया भर में बैठै पाठकों के लिए बड़े स्तर पर पढऩे सामग्री प्रदान करेगा, वहंा खोजार्थियों के लिए बड़ी सुविधा पैदा हो जाएगी। इस सामग्री को जल्द ही एक पोर्टल जरिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा।
भाषा विभाग पंजाब की तरफ से 1.18 लाख दुर्लभ पुस्तकों की डिजीटाईजेशन का कार्य आरंभ
भाषा विभाग पंजाब की तरफ से 1.18 लाख दुर्लभ पुस्तकों की डिजीटाईजेशन का कार्य आरंभ
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