सुर ताल की महफ़िल में बाँसुरी की मधुर तान पर मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
गुंजन चन्ना व डॉ अलंकार की गायकी व पंडित राजेन्द्र प्रसन्ना की बांसुरी की मधुर तान पर मोहित हुए श्रोता , तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हुआ कालिदास ऑडिटोरियम
पटियाला, 19 दिसंबर : गुरुवार की शाम कालीदास ऑडिटोरियम में शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए स्वर्गिक अनुभव लेकर आई। ठिठुरती दिसंबर की सर्दी को दरकिनार करते हुए संगीत प्रेमियों की भारी भीड़ ने यहां शिरकत की । उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NZCC), पटियाला द्वारा आयोजित चार दिवसीय शास्त्रीय संगीत महोत्सव में देश के कई पुरस्कार विजेता संगीतज्ञों की प्रस्तुतियां शामिल थीं । संगीतमय शाम की शुरुआत डॉ. अलंकार सिंह की प्रस्तुति से हुई। उन्होंने राग सुध कल्याण में दो थीम आधारित बंदिशों की प्रस्तुति दी। पहला विलंबित खयाल एक ताल में – “जब ही घर आवे लाल मोरा…” और दूसरा द्रुत खयाल – “एरी अली आज गाओ सब मिलके…।” इसके बाद राग मारवा में द्रुत खयाल “गुरु बिन ज्ञान न पावे…” प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं से जोरदार तालियों की गूंज बटोरी।
इसके बाद शिमला के गुंजन चन्ना ने मंच संभाला। उन्होंने राग बिहाग में अपनी प्रस्तुति शुरू की। उन्होंने विलंबित एक ताल में बंदिश “कैसे सुख सो…” और मध्य लय तीन ताल में बंदिश “बलम रे मेरे मन के…” गाई। अंत में, द्रुत तीन ताल में बंदिश “देखो मोरी रंग में…” प्रस्तुत की। इसके साथ ही उन्होंने पहाड़ी परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हुए “माए नी मेरीए…” जैसे लोकगीतों को भी बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया।
शाम का मुख्य आकर्षण बनारस घराने के प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित राजेंद्र प्रसन्ना की प्रस्तुति रही। उन्होंने राग गोरख कल्याण में आलाप से शुरुआत की। इसके बाद विलंबित एक ताल में बंदिश, तीन ताल में ध्रुव और बनारसी दादरा प्रस्तुत किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का समापन पहाड़ी लोकधुन के साथ किया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर उनके साथ राजेश प्रसन्ना (बांसुरी) और अभिषेक मिश्रा (तबला) ने संगत की। शास्त्रीय संगीत समारोह के तीसरे दिन रोंकीनी गुप्ता व उदय प्रकाश मलिक अपनी स्वर लहरियों से पटियाला के संगीत प्रेमियों को तृप्त करेंगे। केंद्र के निर्देशक फुरकान खान ने पटियाला के संगीत प्रेमियों से अधिकाधिक संख्या में संगीत समारोह में शिरकत की अपील की।
यह संगीत महोत्सव 22 दिसंबर तक जारी रहेगा।
गुरुवार की संध्या तीनों कलाकारों की विस्तृत जानकारी ::
डॉ. अलंकार सिंह, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत और गुरमत संगीत में निपुण एक प्रतिष्ठित गायक और विद्वान हैं। पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला के संगीत विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ. अलंकार ने शास्त्रीय गायन और गुरमत संगीत की प्रारंभिक शिक्षा दिवंगत प्रो. तारा सिंह से प्राप्त की, जो ग्वालियर घराने के प्रख्यात संगीतज्ञ और रचनाकार थे। डॉ. सिंह ने अब तक दुनियाभर में 1,000 से अधिक सार्वजनिक प्रस्तुतियां दी हैं और गुरमत संगीत के साथ-साथ शास्त्रीय संगीत में अपनी अद्वितीय निपुणता का प्रदर्शन किया है। उन्हें खालसा पंथ के पाँचों तख्तों पर प्रस्तुति देने का विशिष्ट गौरव प्राप्त है, जो सिख समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक स्थल हैं। शास्त्रीय संगीत और गुरमत संगीत के प्रति उनकी गहन निष्ठा और समर्पण ने उन्हें इस क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। वे गुरबानी कीर्तन के लिए संगीत नाटक अकादमी के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार प्राप्त करने वाले एकमात्र कलाकार हैं। संध्या के दूसरे प्रमुख कलाकार पंडित राजेंद्र प्रसन्ना थे, जो बनारस घराने के ख्याति प्राप्त बांसुरी और शहनाई वादक हैं।
संगीत की परंपरा वाले परिवार से संबंध रखने वाले प्रसन्ना ने अपने पिता पंडित रघुनाथ प्रसन्ना और चाचा पंडित भोलानाथ प्रसन्ना व पंडित विष्णु प्रसन्ना से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। 1970 में दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद उन्होंने उस्ताद हाफिज अहमद खान और उस्ताद सरफराज खान के सानिध्य में अपनी कला को और निखारा। पंडित प्रसन्ना को यूपी संगीत नाटक अकादमी अवार्ड (1995), “कंसर्ट फॉर जॉर्ज” (2004) के लिए ग्रैमी अवार्ड सर्टिफिकेट, सहारा इंडिया का लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2003), और संगीत नाटक अकादमी अवार्ड (2017) जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। हालांकि, इस संगीत संध्या के मुख्य आकर्षण बने गुंजन चन्ना, जो शिमला (हिमाचल प्रदेश) के एक प्रतिभाशाली भारतीय शास्त्रीय गायक हैं।
गुंजन अपनी प्रारंभिक यात्रा को याद करते हुए कहते हैं, “जून 2021 में मैंने वर्ल्ड म्यूजिक काउंसिल द्वारा आयोजित एक लाइव कॉन्सर्ट में राग मधुवंती की प्रस्तुति दी। यह मेरी शास्त्रीय संगीत की यात्रा की एक महत्वपूर्ण शुरुआत थी।” गुंजन ने देशभर के कई प्रमुख आयोजनों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है, जैसे कि पंजाबी विश्वविद्यालय, पटियाला द्वारा आयोजित इंटर ज़ोनल यूथ फेस्टिवल। ऐसे आयोजनों में भाग लेकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। शास्त्रीय संगीत के प्रति उनका अटूट समर्पण उन्हें देशभर के सांस्कृतिक आयोजनों और उत्सवों का केंद्र बिंदु बनाता है। अपनी मधुर आवाज से वे श्रोताओं का दिल जीतते हुए इस विधा को और ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं।