दीपावली के त्यौहार की असमंजस को दूर करें जगद्गुरु शंकराचार्य

सनातन धर्म की एकता और अखंडता के लिए फैसला जरूरी : पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री

by TheUnmuteHindi
दीपावली के त्यौहार की असमंजस को दूर करें जगद्गुरु शंकराचार्य

दीपावली के त्यौहार की असमंजस को दूर करें जगद्गुरु शंकराचार्य
सनातन धर्म की एकता और अखंडता के लिए फैसला जरूरी : पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री
पटियाला : श्री राम हनुमान सेवा दल के धर्म प्रचारक ज्योतिषाचार्य पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री जी ने बताया कि दीपावली सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है जो की पूरे देश में बहुत ही हरसोलश के साथ मनाई जाती है इस बार लोगों के बीच दीपावली की तारीख को लेकर काफी असमंजस की स्थिति पैदा हो रखी है कि आखिर दीपावली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी या फिर एक नवंबर को तो आईए जानते हैं कि दीपावली इस साल किस दिन मनाई जा रही है हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से दीपावली का त्योहार हमारे लिए बहुत ही खास माना जाता है शास्त्रों के अनुसार 31 अक्टूबर यानी गुरुवार को अमावस्या तिथि दिन में 2:40 से प्रारंभ हो रही है इस कारण से कई विद्वानों ने 31 अक्टूबर को दीपावली मनाई जाए यह प्रस्ताव रखा है परंतु ज्योतिष शास्त्र कहता है कि तिथि हमेशा सूर्य उदय वाली ही पूरे दिन मानी जाती है अतः 31 तारीख को प्रातः काल सूर्य उदय के समय चतुर्दशी तिथि होने के कारण 31 अक्टूबर को दीपावली मनाने का तो कोई तथ्य ही नहीं बनता इसलिए 1 नवंबर 2024 को ही दीपावली मनाने का शुभ दिन और मुहूर्त रहेगा क्योंकि 1 नवंबर के दिन सूर्य उदय काल में अमावस्या तिथि होने के कारण दीपावली 1 नवंबर को ही मनाई जाएगी वैसे भी पंचांग के अंतर्गत साफ शब्दों में दीपावली एक तारीख को ही दी गई है दीपावली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि विधान से पूजा की जाती है इसलिए इस बार लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 1 नवंबर 2024 प्रातः काल से लेकर रात्रि बेल तक शुभ माना जाएगा वैसे भी लक्ष्मी की हर किसी को आवश्यकता है और धन ही सब कुछ नहीं परंतु धन के बिना भी कुछ नहीं इसलिए कोई एक सुनिश्चित टाइम लक्ष्मी पूजा के लिए निकालना उचित नहीं रहेगा और 1 नवंबर 2024 को प्रातः काल से लेकर मध्यरात्रि तक आप कभी भी मां लक्ष्मी की पूजा कर सकते हो और दीपावली का यह भव्य त्यौहार मना सकते हो मैं किसी की आलोचना नहीं बल्कि सनातन संस्कृति में जिस प्रकार तिथियो के बारे में उल्लेख किया गया है पंचांग के अनुसार सूर्य उदय काल की तिथि को ही पूर्ण तिथि माना जाता है इस तथ्य पर अपना विचार दे रहा हूं वैसे भी विभिन्न गरथो में लिखा हुआ है की 16 संस्कारों के लिए मुहूर्त निकालना चाहिए दीपावली के लिए पूरा ही दिन शुभ माना जाता है इसलिए दीपावली पर किसी भी मुहूर्त की आवश्यकता नहीं है और आप एकजुट एक मुठ होकर के अपने दो-दो दिन में त्योहार को बांटने से बेहतर है कि योहारों को एक ही दिन में बड़े हर्ष और उल्लास के साथ बनाना चाहिए. सनातन धर्म के साथ एक अजीब सा खिलवाड़ किया जा रहा है हर त्योहार करवा चौथ दो दिन दीपावली दो दिन जिसकी वजह से लोगों के मन में ब्राह्मणों के प्रति भी गलत भाव पैदा हो रहे हैं जबकि इसमें ब्राह्मण की कोई गलती नहीं हमारे धर्मआचार्य पीठाधीश्वरों को पंचांग के निकलते वक्त यह निश्चित कर देना चाहिए की कौन सी तिथि पर कौन सा त्यौहार मनाया जाएगा अन्यथा इसका परिणाम काफी घातक साबित हो सकता है यदि हमारे धर्माचार्य अभी जागृत नहीं हुए दो दो व्रत त्यौहार का कारण सिर्फ और सिर्फ हमारे धर्माचार्य जो मुख्य पीठाधीश है एवं जो पंचांग करता है जिसकी वजह से सनातन धर्म पर लोग कटाक्ष करने पर मजबूर हो जाते हैं आश्चर्य की बात तो यह है कि हमारे चारों पीठ के शंकराचार्य इस दुविधा के अवसर पर मौन धारण करके बैठे हैं क्यों ?जब सनातन धर्म के अनुयाई तिथि के असमंजस में दो-दो दिवालिया मनाने पर मजबूर हो रखे हैं इस समय चारों पीठ के पीठाधीश्वर एवं काशी हरिद्वार जैसे पवित्र तीर्थौ के विद्वानों को लोगों की दुविधा का मार्ग ढूंढना चाहिए और एक तिथि एक व्रत एक त्यौहार की घोषणा करनी चाहिए सारे देशवासियों को हमारी तरफ से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

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