चंडीगढ़, 20 जून 2026: आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण ज़िंदगी में योग शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए वरदान साबित हो रहा है। हर साल 21 जून को पूरी दुनिया में बहुत उत्साह के साथ ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस‘ मनाया जाता है।
योग भारत की एक प्राचीन और अनमोल परंपरा है। यह सिर्फ़ शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि मन, शरीर और आत्मा को एक साथ जोड़ने का विज्ञान है। आज यह भारत की सीमाओं से बाहर निकलकर एक अंतर्राष्ट्रीय पहचान बन चुका है। ‘योग’ शब्द संस्कृत के ‘युज’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना या मिलाना। यह आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से जोड़ता है।
इस दिन को मनाने की शुरुआत का प्रस्ताव भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने भाषण के दौरान दिया था। इस प्रस्ताव को रिकॉर्ड 177 देशों का समर्थन मिला और 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ घोषित किया। पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था।
योग दिवस के लिए 21 जून ही क्यों?
21 जून उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे ‘ग्रीष्म संक्रांति’ (Summer Solstice) कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में इस समय का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, इसीलिए इस दिन को चुना गया।
योग के लाभ
शारीरिक लचीलापन और ताकत: अलग-अलग आसन शरीर की मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाते हैं, जिससे शरीर में अकड़न कम होती है।
मानसिक शांति और तनाव से राहत: प्राणायाम (सांस लेने के व्यायाम) और ध्यान से मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है।
बीमारियों से बचाव: नियमित योग अभ्यास से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, मोटापा और दिल की बीमारियों को नियंत्रण में रखा जा सकता है।
एकाग्रता में वृद्धि: योग छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए दिमाग की कार्यक्षमता और एकाग्रता बढ़ाने में बहुत मददगार है। अगर स्कूली छात्रों, खासकर चंचल मन वाले बच्चों से योग करवाया जाए, तो पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की उनकी क्षमता बढ़ती है और बच्चे अपने लक्ष्य हासिल करते हैं। योग आसन एथलीटों में लचीलापन लाते हैं और उनकी एकाग्रता भी बढ़ाते हैं। योग के मुख्य हिस्से
योग सिर्फ़ आसनों तक ही सीमित नहीं है, इसमें मुख्य रूप से तीन चीज़ें शामिल हैं।
अष्टांग योग- इसमें योग के आठ मुख्य चरणों के बारे में बताया गया है: यम: अहिंसा, सत्य, चोरी न करना।
नियम: शारीरिक शुद्धि, संतोष और आत्म-अनुशासन। आसन: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अलग-अलग मुद्राएँ। प्राणायाम: साँस लेने की क्रियाएँ जो मन को शांत करती हैं। प्रत्याहार: इंद्रियों पर नियंत्रण। धारणा: मन की एकाग्रता। ध्यान: मेडिटेशन या लगातार एकाग्रता। समाधि: अंतिम अवस्था या आध्यात्मिक ज्ञान।

उपयोगी आसन और उनके फ़ायदे – कुछ मुख्य आसन जो आपके शरीर को लचीला और तनाव-मुक्त रखने में मदद करते हैं: वज्रासन: यह आसन खाना खाने के बाद भी किया जा सकता है। यह पाचन में सुधार करता है। भुजंगासन: पीठ दर्द से राहत देता है और रीढ़ की हड्डी को मज़बूत बनाता है। शवासन: पूरे शरीर को आराम देता है और अनिद्रा जैसी बीमारियों को ठीक करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी दौलत है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में, जहाँ इंसान अपने लिए समय नहीं निकाल पाता, रोज़ाना सिर्फ़ 20-30 मिनट योग करके एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जिया जा सकता है। आइए, इस योग दिवस पर हम सब संकल्प लें कि हम योग को सिर्फ़ एक दिन के लिए नहीं, बल्कि अपनी रोज़मर्रा की जीवनशैली का हिस्सा बनाएँगे।
डॉ. वरिंदर कुमार, सुनाम उधम सिंह वाला।