चंडीगढ़, 22 अक्टूबर 2026: पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुलाकात की। टस्क 21 से 23 अक्टूबर तक भारत के दौरे पर हैं। इस मुलाकात में दोनों देशों के पुराने रिश्तों की झलक साफ दिखी। मोदी ने ‘गुड महाराजा’ का जिक्र किया।
यह नाम जामनगर के महाराजा दिग्विजयसिंहजी रणजीतसिंहजी जडेजा को दिया गया था। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के करीब एक हजार बच्चों को भारत में शरण दी थी। 1939 में जर्मनी और सोवियत संघ के हमलों के बाद पोलैंड पर कब्जा हो गया। हजारों पोलिश नागरिक बेघर हो गए। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल थे।
1942 में नवानगर रियासत के महाराजा दिग्विजयसिंहजी ने जामनगर के पास बालाचड़ी में करीब एक हजार पोलिश बच्चों को शरण दी। उन्होंने उनके रहने खाने पढ़ाई और इलाज का इंतजाम किया। बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने का मौका भी मिला। इसी मदद के कारण पोलैंड में महाराजा को ‘डोब्री महाराजा’ यानी ‘गुड महाराजा’ कहा जाने लगा।
भारत में पोलिश शरणार्थियों को दूसरी जगहों पर भी शरण मिली। 1943 में कोल्हापुर रियासत के वलीवडे शिविर में करीब पांच हजार पोलिश शरणार्थी रहे। यहां उनके लिए स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं उपलब्ध थीं।
1945 में दूसरा विश्व युद्ध खत्म हुआ। इसके बाद पोलिश नागरिक अपने देश लौटने लगे। 1948 तक ज्यादातर शरणार्थी पोलैंड लौट चुके थे।
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