सीईसी को आजीवन इम्युनिटी देने वाले कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

by Manu
सुप्रीम कोर्ट

चंडीगढ़, 05 नवंबर 2026: मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के लिए सिविल और आपराधिक मुकदमों से आजीवन छूट देने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह चुनौती मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 16 को लेकर दी गई है। इस प्रावधान के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों को आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के संबंध में सिविल मामले और आपराधिक कार्यवाही से कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

इस मामले में याचिका दाखिल करने वाला संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी मोहना शामिल हैं। अदालत ने इस याचिका को इसी मुद्दे पर पहले से लंबित लोक प्रहरी की याचिका के साथ जोड़ दिया है।

धारा 16 के तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त या अन्य निर्वाचन आयुक्तों के खिलाफ उनके आधिकारिक कामकाज के दौरान किए गए कार्यों या दिए गए बयानों को लेकर कोई सिविल मामला या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह छूट उनके पद पर रहते हुए भी लागू रहती है और पद छोड़ने के बाद भी जारी रहती है।

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