चंडीगढ़, 22 अक्टूबर 2026: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे और फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की तस्वीरों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रेहान ने आरोप लगाया है कि दिल्ली के बीकानेर हाउस में उनकी एकल प्रदर्शनी शुरू होने से पहले दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी कई तस्वीरें हटा दी गईं। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शनी से करीब 70 तस्वीरें हटाए जाने का दावा किया गया है। इस मामले पर प्रियंका गांधी ने अपने बेटे का समर्थन करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं।
रेहान वाड्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के स्टोरी पर लिखा कि पांच घंटे पहले बीकानेर हाउस प्रबंधन ने मुझे अपने शो नो आइडिया इज़ फाइनल जो शाम सात बजे शुरू होने वाला है इस प्रदर्शनी में लगी ज्यादातर कलाकृतियों को हटाने के लिए मजबूर किया गया। ये तस्वीरें दिल्ली में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन की थीं। जाहिर है उन्हें यह सामग्री आपत्तिजनक लगी।
इसके साथ ही रेहान ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा कि उन्होंने मुझसे तिरंगे की दो तस्वीरें हटाने के लिए भी कहा। मैंने मना कर दिया। मैं भारतीय तिरंगे की तस्वीर नहीं हटाऊँगा। फिलहाल यह शो आंशिक रूप से ही चलेगा। लेकिन मैं कोई दूसरी जगह ढूँढूँगा। और विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरों का पूरा कलेक्शन वहाँ प्रदर्शित करूँगा।
इस पूरे मामले पर रेहान के पिता रॉबर्ट वाड्रा का बयान सामने आया है। रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि उन पर सब कुछ हटाने का बहुत दबाव था। यह उनकी प्रदर्शनी शुरू होने से ठीक दो घंटे पहले हुआ। यह हैरान करने वाला था क्योंकि प्रशासन को एक हफ्ते पहले ही पीडीएफ फाइल मिल गई थी। उन्हें प्रदर्शनी के बारे में बता दिया गया था। प्रदर्शनी लगाने में दो दिन का समय लगता है। प्रशासन ने जगह का दौरा किया था। डिस्प्ले देखे थे। और तब कोई आपत्ति नहीं जताई थी। लेकिन प्रदर्शनी शुरू होने से कुछ घंटे पहले बिना किसी स्पष्टीकरण के हालात बदल गए।
रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि इसके बावजूद मुझे लगता है कि उन्होंने बहुत हिम्मत दिखाई। और जो कुछ भी बचा था उसी के साथ प्रदर्शनी जारी रखी। जैसा कि मैंने कहा मुझे उन पर गर्व है। जिन्हें आमंत्रित किया गया था वे सभी प्रदर्शनी में आए। क्योंकि यह उनका पेशा भी है। बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार के अंतर्गत आता है। मैं बस इतना कह सकता हूं कि अगर हम लोकतंत्र में विश्वास करते हैं तो रचनात्मक दुनिया में राजनीति को लाने का कोई मतलब नहीं है। हर किसी को अपनी बात रखने की आजादी होनी चाहिए।
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