बैंकॉक, 15 अक्टूबर 2026: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। जर्मनी ने रूस को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहले की तरह सामान्य सदस्य का दर्जा देने का विरोध किया है। वहीं, ब्रिटेन ने रूस से जुड़े जहाजों पर और सख्त प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब बैंकॉक में G20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक प्रमुखों की बैठक हो रही है।
इस बैठक में रूस के वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव भी शामिल हुए। रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका को लेकर लगातार बहस होती रही है। अब सवाल यह है कि युद्ध खत्म करने के लिए रूस से बातचीत बढ़ाई जाए या उस पर आर्थिक दबाव बनाए रखा जाए।
जर्मनी ने रूस की वापसी का विरोध क्यों किया?
जर्मनी के वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबाइल ने कहा कि रूस को G20 में ऐसे वापस नहीं आने दिया जा सकता, जैसे कुछ हुआ ही न हो। उनका कहना है कि यूक्रेन पर रूस के हमले को नजरअंदाज करके उसे सामान्य सदस्य की तरह स्वीकार करना यूरोपीय देशों के लिए उचित नहीं होगा।
G20 दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, अमेरिका, चीन, रूस और यूरोपीय संघ समेत कई बड़े आर्थिक पक्ष शामिल हैं। समूह की बैठकें वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, वित्तीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा के लिए होती हैं।
जर्मनी का रुख यह संकेत देता है कि यूक्रेन युद्ध के कारण रूस के साथ संबंध सामान्य करने पर यूरोप के भीतर और बाहर सहमति नहीं बनी है।
अमेरिका बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है
अमेरिकी वित्त विभाग की अधिकारी एरिन ब्राउन ने कहा कि संकट का समाधान निकालने के लिए बातचीत जरूरी है। उनके अनुसार, अगर देश एक-दूसरे से बात ही नहीं करेंगे, तो विवाद सुलझाने की संभावना भी कम हो जाएगी। अमेरिका का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने की कोशिश जारी है।
इस तरह अमेरिका और जर्मनी के रुख में अंतर दिखाई देता है। अमेरिका बातचीत के लिए रूस की भागीदारी को जरूरी मान रहा है, जबकि जर्मनी का जोर है कि रूस को बिना जवाबदेही के सामान्य अंतरराष्ट्रीय भूमिका नहीं मिलनी चाहिए।
हालांकि, बातचीत जारी रखने का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि अमेरिका ने रूस के सभी कदमों को स्वीकार कर लिया है। दोनों पक्षों के बीच मुख्य बहस इस बात पर है कि युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक संपर्क और आर्थिक प्रतिबंधों का संतुलन कैसे बनाया जाए।
ब्रिटेन ने रूस से जुड़े जहाजों पर सख्त प्रतिबंध मांगे
ब्रिटेन के वित्त मंत्री जॉन हीली ने दूसरे देशों से रूस से जुड़े जहाजों और उनकी सेवाओं पर प्रतिबंध और कड़े करने की अपील की। ब्रिटेन का कहना है कि कुछ जहाजों के जरिए रूस तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का कारोबार करता है, जिससे उसे युद्ध के लिए आर्थिक संसाधन मिलते हैं।
रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का एक उद्देश्य उसकी तेल से होने वाली कमाई और युद्ध से जुड़ी आर्थिक गतिविधियों को सीमित करना है। लेकिन प्रतिबंधों को लेकर सभी पश्चिमी देशों की नीति एक जैसी नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन कुछ रूसी तेल उत्पादों और जहाजों पर लागू प्रतिबंधों में ढील देने पर भी विचार कर रहा है। इससे अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच रणनीति को लेकर मतभेद और स्पष्ट हो गए हैं।
यूक्रेन की आर्थिक मदद पर भी चर्चा
बैठक के दौरान यूक्रेन की आर्थिक जरूरतों पर भी चर्चा हुई। यूरोपीय संघ ने 2027 में यूक्रेन के लिए 45 अरब यूरो की सहायता का वादा किया है। हालांकि, युद्ध से प्रभावित देश की जरूरतें इससे अधिक हो सकती हैं और अतिरिक्त वित्तीय मदद जुटाने के प्रयास जारी हैं।
युद्ध के दौरान यूक्रेन को केवल सैन्य सहायता ही नहीं, बल्कि सरकारी सेवाएं चलाने, ऊर्जा सुविधाओं की मरम्मत और बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए भी धन की जरूरत है।
जर्मनी ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ यूक्रेन की आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने पर चर्चा कर रहा है। ब्रिटेन ने यूक्रेन के चोर्नोबिल परमाणु संयंत्र की मरम्मत के लिए 1.7 करोड़ पाउंड की सहायता देने की भी घोषणा की है। यह संयंत्र पिछले साल रूसी ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हुआ था।
आगे क्या असर पड़ सकता है?
G20 में रूस की भूमिका और उस पर लगे प्रतिबंधों को लेकर मतभेद बताते हैं कि युद्ध खत्म करने की रणनीति पर पश्चिमी देशों के बीच पूरी सहमति नहीं है। अमेरिका बातचीत को आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दे रहा है, जबकि जर्मनी और ब्रिटेन रूस पर दबाव बनाए रखने की बात कर रहे हैं।
इन मतभेदों का असर आगे की कूटनीतिक बातचीत, रूस के साथ आर्थिक संबंधों और यूक्रेन को मिलने वाली सहायता पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन चर्चाओं से रूस पर प्रतिबंधों में कोई बड़ा बदलाव होगा या युद्ध खत्म करने की दिशा में नई सहमति बनेगी।
फिलहाल सबसे अहम बात: रूस को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किस भूमिका में शामिल किया जाए और यूक्रेन युद्ध के बीच आर्थिक प्रतिबंध कितने सख्त रखे जाएं—यह मुद्दा G20 की चर्चा के केंद्र में है।
ये भी देखें: रूस-यूक्रेन युद्ध, G20 बैठक और अमेरिका-यूरोप के कूटनीतिक संबंधों से जुड़ी ताजा खबरें।