पटना, 15 अक्टूबर 2026: बिहार में विधान परिषद चुनाव के बीच जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शिक्षकों की सैलरी और युवाओं को रोजगार देने को लेकर कई वादे किए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होगी कि राज्य के सभी शिक्षकों को अगले लोकसभा चुनाव से पहले सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन का लाभ मिले। इसमें सरकारी, नियोजित, मदरसा और संस्कृत विद्यालयों के शिक्षक शामिल होंगे।
प्रशांत किशोर का कहना है कि अगर उनकी पार्टी शिक्षकों के लिए यह व्यवस्था लागू कराने में सफल नहीं होती, तो वह अगले लोकसभा चुनाव में वोट मांगने नहीं आएंगे।
हालांकि, यह अभी प्रशांत किशोर का राजनीतिक वादा है। बिहार सरकार ने सभी शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग का लाभ देने का कोई नया फैसला किया है, ऐसा इस रिपोर्ट से साबित नहीं होता।
7वें वेतन आयोग का लाभ मिलने का क्या मतलब है?
आसान शब्दों में, सातवें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार वेतन तय होने का मतलब है कि पात्र कर्मचारियों की सैलरी एक तय वेतन ढांचे के आधार पर निर्धारित की जाती है। इससे उनकी बेसिक सैलरी और उससे जुड़े भत्तों पर असर पड़ सकता है।
बिहार में अलग-अलग तरह के शिक्षकों की नौकरी और वेतन के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी शिक्षकों को इस व्यवस्था का लाभ देने के लिए सरकार को संबंधित नियमों, पात्रता और वेतन निर्धारण पर फैसला लेना होगा।
शिक्षकों के अलावा रोजगार पर भी किया वादा
प्रशांत किशोर ने स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की बात भी कही। उन्होंने वादा किया कि अगर जन सुराज का उम्मीदवार चुनाव जीतता है, तो योग्यता के आधार पर 10,000 स्थानीय युवाओं को निजी कंपनियों में नौकरी दिलाने में मदद की जाएगी।
हालांकि, इस घोषणा को लागू करने के लिए किन कंपनियों से संपर्क किया जाएगा, भर्ती कैसे होगी और नौकरी किन क्षेत्रों में मिलेगी, इसकी विस्तृत योजना रिपोर्ट में सामने नहीं आई है।
चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी नियमों के पालन को लेकर चिंता जताई। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग की। ये उनके आरोप और राजनीतिक बयान हैं; इन्हें चुनाव आयोग की ओर से साबित की गई गलती नहीं माना जाना चाहिए।
अब आगे क्या होगा?
प्रशांत किशोर के इन वादों पर अब सवाल यह है कि इन्हें पूरा करने के लिए क्या ठोस योजना बनाई जाती है। शिक्षकों के वेतन में बदलाव के लिए सरकारी मंजूरी और नियमों की जरूरत होगी। इसी तरह, युवाओं को नौकरी दिलाने के वादे के लिए भी भर्ती प्रक्रिया और कंपनियों के साथ व्यवस्था स्पष्ट करनी होगी।
फिलहाल, शिक्षकों के लिए सातवें वेतन आयोग का लाभ और 10,000 युवाओं को रोजगार दिलाना प्रशांत किशोर के चुनावी वादे हैं, लागू हो चुकी सरकारी योजनाएं नहीं।
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