UP MLC Election: अखिलेश यादव की पार्टी पहुंची चुनाव आयोग, योगी और दोनों डिप्टी CM के कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी की मांग

by Priya

लखनऊ, 15 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 विधान परिषद (MLC) सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सियासी विवाद बढ़ गया है। समाजवादी पार्टी (SP) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कार्यक्रमों पर नजर रखने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। पार्टी ने मांग की है कि इन कार्यक्रमों की वीडियोग्राफी कराई जाए और जहां आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

इन 11 सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर को होना है। समाजवादी पार्टी का आरोप है कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल मतदाता समूहों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, ये आरोप पार्टी की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें चुनाव आयोग या अदालत द्वारा साबित किया गया निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों पर SP ने क्या सवाल उठाए?

समाजवादी पार्टी ने अपने ज्ञापन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया कार्यक्रमों का जिक्र किया। पार्टी के मुताबिक, 12 अक्टूबर को गोरखपुर में मुख्यमंत्री ने करीब 12,000 शिक्षकों को संबोधित किया। इसके बाद 13 अक्टूबर को उन्होंने लगभग 68,000 ग्राम प्रहरियों के कार्यक्रम को संबोधित किया। SP ने ग्राम प्रहरियों के भत्ते में बढ़ोतरी और नई भर्तियों की घोषणा को भी चुनाव से जोड़कर सवाल उठाए।

पार्टी का कहना है कि चुनाव की घोषणा के बाद सरकारी कार्यक्रमों के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाना निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है। इसी आधार पर उसने चुनाव आयोग से कार्यक्रमों की रिकॉर्डिंग कराने और जरूरत पड़ने पर नोटिस जारी करने की मांग की है।

दोनों डिप्टी CM को लेकर भी शिकायत

SP ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य के कार्यक्रमों पर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन के मुताबिक, ब्रजेश पाठक इलाहाबाद-झांसी निर्वाचन क्षेत्र और केशव प्रसाद मौर्य लखनऊ निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े इलाकों में सक्रिय हैं।

समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य चुनाव को प्रभावित करना हो सकता है। पार्टी ने चुनाव आयोग से अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका पर भी निगरानी रखने की मांग की है। इन आरोपों पर किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए आयोग की जांच या आधिकारिक प्रतिक्रिया जरूरी होगी।

चुनाव आयोग से और क्या मांग की गई?

समाजवादी पार्टी के ज्ञापन में चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने से जुड़ी कुछ अन्य मांगें भी शामिल हैं। पार्टी ने चुनाव संबंधी काम में लगाए गए सरकारी इंजीनियरों और अन्य कर्मचारियों के नाम तथा मोबाइल नंबर सार्वजनिक करने की मांग की है।

इसके अलावा, पार्टी ने मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं की सूची चस्पा करने की मांग रखी, ताकि मतदाता सूची की जांच की जा सके। SP ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि आदर्श आचार संहिता से जुड़ी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई की जाए।

23 अक्टूबर के मतदान से पहले क्यों अहम है यह विवाद?

शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनाव सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं। इनमें संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के पंजीकृत मतदाता मतदान करते हैं। इसलिए उम्मीदवारों तक पहुंच, सरकारी कार्यक्रमों की प्रकृति और चुनावी नियमों का पालन महत्वपूर्ण मुद्दे बन जाते हैं।

अब यह देखना होगा कि समाजवादी पार्टी की शिकायत पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी या चुनाव आयोग क्या कदम उठाते हैं। किसी कार्यक्रम में आचार संहिता का उल्लंघन हुआ है या नहीं, इसका फैसला संबंधित नियमों और तथ्यों की जांच के आधार पर ही किया जा सकता है।

फिलहाल स्पष्ट बात यह है: SP ने चुनाव आयोग से निगरानी और कार्रवाई की मांग की है, जबकि शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

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