पटना, 14 अगस्त 2026: बिहार सरकार ने भूमि निबंधन की प्रक्रिया को अधिक सरल, सुरक्षित, पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में अत्याधुनिक डिजिटल एवं पेपरलेस निबंधन प्रणाली (Home Registry Digital System) लागू की गई है। इस व्यवस्था के तहत भूमि निबंधन की प्रक्रिया को कागजी कार्यवाही से मुक्त करते हुए डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 11 जुलाई 2026 को जिला निबंधन कार्यालय, वैशाली (हाजीपुर) में इस प्रणाली के तहत चार महत्वपूर्ण सेवाओं—होम रजिस्ट्रेशन, भूमि संबंधी ऑनलाइन जांच, पेपरलेस निबंधन तथा GIS तकनीक से स्थल निरीक्षण—का शुभारंभ किया। इसी अवसर पर 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट की शुरुआत की गई। बाद में मुख्यमंत्री ने इस सुविधा की आयु सीमा घटाकर 75 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए घर बैठे निबंधन की सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की।
पूरी निबंधन प्रक्रिया होगी डिजिटल और पेपरलेस
नई व्यवस्था का उद्देश्य जमीन की रजिस्ट्री से जुड़ी कागजी औपचारिकताओं को न्यूनतम करना और नागरिकों को अधिक सुविधाजनक डिजिटल सेवा उपलब्ध कराना है। सरकार की इस पहल से निबंधन प्रक्रिया में दस्तावेजों के डिजिटल प्रबंधन, ऑनलाइन सत्यापन तथा डिजिटल रिकॉर्ड को बढ़ावा मिलेगा।
निबंधन विभाग की मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था में दस्तावेज की सॉफ्ट कॉपी अपलोड करने, निबंधन कार्यालय में उपस्थिति के लिए ऑनलाइन तिथि एवं समय चुनने तथा निबंधित दस्तावेज की सॉफ्ट कॉपी डाउनलोड करने की सुविधा पहले से उपलब्ध है।
नई पेपरलेस व्यवस्था का उद्देश्य इसी डिजिटल इकोसिस्टम को और व्यापक बनाते हुए भूमि निबंधन की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन एवं कागजरहित बनाना है।
जमीन खरीदने से पहले ऑनलाइन जांच
पेपरलेस निबंधन प्रणाली में भूमि की खरीद-बिक्री से पहले उसकी वास्तविक स्थिति की ऑनलाइन जांच को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। नई व्यवस्था में GIS तकनीक और ऑनलाइन सत्यापन के माध्यम से संबंधित भूमि की स्थिति की पुष्टि की जाएगी। इससे खरीदार को जमीन से संबंधित जानकारी अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
सरकार का उद्देश्य है कि भूमि की खरीद-बिक्री से पहले उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड और स्थल संबंधी जानकारी के आधार पर आवश्यक सत्यापन किया जा सके। इससे गलत अथवा भ्रामक जानकारी के आधार पर होने वाले लेन-देन की संभावना को कम करने और भूमि विवादों में कमी लाने में मदद मिलेगी।
GIS तकनीक से स्थल निरीक्षण
निबंधन प्रक्रिया में Geographic Information System (GIS) तकनीक के उपयोग से जमीन के स्थल संबंधी विवरण के सत्यापन को अधिक तकनीकी एवं प्रभावी बनाया जा रहा है। GIS आधारित व्यवस्था से भूमि की लोकेशन एवं उपलब्ध डिजिटल जानकारी को तकनीकी रूप से जोड़ा जा सकेगा। इससे भूमि लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने और खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा की दिशा में मदद मिलेगी।
ये भी देखे: पायलट प्रोजेक्ट के तहत सतौज में 41 किलोमीटर तारें जमीन के अंदर होंगी – सीएम भगवंत मान