चंडीगढ़, 12 अगस्त 2026: आग को कुछ ही मिनटों में बुझाया जा सकता है, लेकिन उससे होने वाला नुकसान लंबे समय तक बना रह सकता है। बुरी तरह जलने वाले व्यक्ति के लिए, आग की लपटों से बाहर निकलना तो बस शुरुआत भर है। इसके बाद बार-बार ड्रेसिंग, कई तरह की मेडिकल प्रक्रियाएं, शरीर के अंगों को ठीक करने की सर्जरी (रिकंस्ट्रक्शन) और ठीक होने में महीनों का समय लगता है। पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना (MMSY) के तहत जलने के इलाज से जुड़े ताज़ा आंकड़े इस मुश्किल सफर को दिखाते हैं। इस योजना के तहत ₹1.39 करोड़ की लागत से जलने के 265 इलाज किए गए हैं।
24 साल के अर्जुन कुमार तब घायल हो गए जब शॉर्ट सर्किट की वजह से उनके घर में आग लग गई। उन्हें इलाज के लिए बठिंडा ले जाया गया, जहां उन्हें इस योजना के तहत लगभग ₹50,000 का कैशलेस इलाज मिला। अपने अनुभव को याद करते हुए उन्होंने कहा, “सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ।” इलाज कैशलेस होने की जानकारी मिलने के बाद, उन्होंने कहा कि वे अस्पताल के खर्च की चिंता करने के बजाय ठीक होने पर ध्यान दे पाए।
पंजाब स्टेट हेल्थ एजेंसी (SHA) से मिले आंकड़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत 31 से 45 साल की उम्र के पुरुषों का 61 बार इलाज किया गया, जो सभी आयु समूहों में सबसे ज़्यादा है। इन इलाज पर ₹31.82 लाख खर्च हुए। 0 से 18 साल की उम्र के लड़कों का 39 बार इलाज हुआ, जबकि इसी उम्र की लड़कियों का 27 बार इलाज हुआ।
महिलाओं में, 19 से 30 साल की उम्र की महिलाओं का सबसे ज़्यादा 26 बार इलाज हुआ, जबकि 31 से 45 साल की उम्र की महिलाओं का 21 बार इलाज हुआ। आसान शब्दों में कहें तो, इलाज पाने वाले लोग बच्चे, युवा और काम करने की उम्र वाले लोग थे।
पंजाब के ये आंकड़े जलने से लगी चोटों के लंबे समय तक रहने वाले असर पर हुई मेडिकल रिसर्च के नतीजों से भी मेल खाते हैं। PubMed में छपी एक स्टडी के अनुसार, पंजाब के एक बड़े अस्पताल (टर्शियरी हॉस्पिटल) में जलने से घायल 892 मरीज़ों पर की गई स्टडी में पाया गया कि 79 प्रतिशत मरीज़ 15 से 45 साल की उम्र के थे। इससे पता चलता है कि जलने की घटनाएं काम करने की उम्र वाले लोगों पर गंभीर असर डाल सकती हैं। स्टडी में भारत में आसानी से उपलब्ध और किफायती बर्न केयर (जलने के इलाज) की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया गया।
इस बारे में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “आग बुझने के साथ ही जलने से हुई चोटें खत्म नहीं हो जातीं। कई मरीज़ों के लिए ठीक होने का मतलब है बार-बार मेडिकल प्रक्रियाएं, रिहैबिलिटेशन और लंबे समय तक देखभाल। हमारी प्राथमिकता यह पक्का करना है कि आर्थिक तंगी इन परिवारों के लिए एक और मुसीबत न बन जाए। मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत, मरीज़ इलाज के खर्च की चिंता करने के बजाय ठीक होने और अपनी ज़िंदगी को पटरी पर लाने पर ध्यान दे सकें।”
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