पंजाब सरकार ने ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और आंखों से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती स्तर पर पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित स्क्रीनिंग डिवाइस की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल को एसीटी ग्रांट्स के सहयोग से 8 जिलों में लागू किया गया है।
पोर्टेबल और एआई आधारित उपकरणों का इस्तेमाल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्क्रीनिंग के लिए किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक शुरुआती जांच की सुविधा पहुंचाना है।
इस पहल के तहत ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए थर्मल आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह स्क्रीनिंग रेडिएशन के बिना की जाती है और पोर्टेबल उपकरणों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य स्तर पर इस्तेमाल की जा सकती है।
सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए स्मार्ट स्कोप का उपयोग किया जा रहा है। वहीं, आंखों से जुड़ी समस्याओं की शुरुआती जांच के लिए पोर्टेबल ऑटो-रिफ्रैक्टोमीटर उपलब्ध कराए गए हैं।
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह द्वारा आईसीएमआर के नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के आधार पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में पंजाब में कैंसर के 42,288 नए मामले सामने आए। यह संख्या पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 7 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
कैंसर के बढ़ते मामलों के बीच शुरुआती जांच महत्वपूर्ण है, क्योंकि बीमारी की समय पर पहचान होने से मरीज को आगे की जांच और इलाज के लिए जल्द रेफर किया जा सकता है।
एनएफएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब में 30 से 49 वर्ष आयु वर्ग की केवल 0.3 प्रतिशत महिलाओं ने ब्रेस्ट कैंसर की स्क्रीनिंग कराई है। इसी आयु वर्ग में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग का आंकड़ा 2.4 प्रतिशत है।
पंजाब सरकार ने इस कार्यक्रम के तहत प्रतिदिन कम से कम 600 लोगों की आंखों की जांच करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के लिए प्रतिदिन कुल 300 स्क्रीनिंग करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यदि यह लक्ष्य नियमित रूप से हासिल होता है, तो स्थानीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों की शुरुआती जांच की जा सकेगी। संदिग्ध मामलों की पहचान होने पर मरीजों को आगे की जांच और विशेषज्ञ इलाज के लिए रेफर किया जा सकता है।
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