चंडीगढ़, 17 जुलाई 2026: सीजीसी लांडरां के चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (सीसीटी) के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट द्वारा ‘एआई-ड्रिवेन बायोटेक्नोलॉजी : ट्रांसफॉर्मिंग रिसर्च, टीचिंग और इन्नोवेशन’ टॉपिक पर पाँच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के प्रमुख शिक्षाविदों, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स, साइंटिस्ट्स तथा एआई प्रोफेशनल्स ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य बायोटेक्नोलॉजी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अर्टिफिशल इंटेलिजेंस की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार-विमर्श करना तथा इसके विभिन्न आयामों का अन्वेषण करना था। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी (सीसीटी), सीजीसी लांडरां की डायरेक्टर – प्रिंसिपल डॉ. पालकी साहिब कौर, सी-डैक मोहाली के जॉइंट डायरेक्टर एंड हेड एसीएस डीवीज़न डॉ. बलविंदर सिंह तथा एसटीपीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस-न्यूरॉन, मोहाली की सीओओ डॉ. ममता भारद्वाज ने अपने विचार व्यक्त किए। स्पीकर्स ने इन्नोवेशन, इंडस्ट्री और एकेडेमिया के कोलेबोरेशन तथा बायोटेक्नोलॉजी के भविष्य को आकार देने में एआई आधारित शिक्षा के बढ़ते महत्व पर विशेष बल दिया।
पाँच दिनों तक चले इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में एक्सपर्ट लेक्चर्स के साथ-साथ हैंड्स ऑन लर्निंग एक्सपीरियंस का भी आयोजन किया गया। एनएमआईएमएस चंडीगढ़ के स्कूल ऑफ टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एंड इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आदित्य बख्शी ने प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा एआई टूल्स पर विस्तृत सत्र आयोजित किए।
अनुदीप फाउंडेशन के सेंटर मैनेजर एवं वर्कफोर्स डेवलपमेंट लीडर श्री मोहम्मद निसार ने प्रतिभागियों को एआई फंडामेंटल्स, वर्कप्लेस पर प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में इसकी भूमिका तथा जनरेटिव एआई से परिचित कराया। वहीं, कॉड्रॉयड हब के फाउंडर श्री देवाशीष ने एआई-ड्रिवेन बायोटेक्नोलॉजी के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए। इसी क्रम में, इटरनल रेस्टेम की फाउंडर डॉ. जागृति ने ‘एप्लाइड डेटा साइंस इन बायोटेक्नोलॉजी टूल्स, टेक्नीक्स एंड केस स्टडीज़’ टॉपिक पर व्याख्यान दिया।
काइज़ेन सिस्टम्स, चंडीगढ़ की डॉ. तुलिका मेहता ने जनरेटिव एआई के प्रैक्टिकल ऍप्लिकेशन्स का प्रदर्शन किया, जबकि पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेटर, मोहाली की साइंटिस्ट एंड हेड क्यूए डॉ. वंदना अवस्थी ने फ़ूड सुरक्षा तथा नियामक ढाँचों में उभरते रुझानों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंतर्गत प्लाक्षा यूनिवर्सिटी के बायोलॉजिकल सिस्टम्स इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोनिका शर्मा ने बायोटेक्नोलोग्य एजुकेशन में एआई की भूमिका पर व्याख्यान दिया। वहीं, एमिटी विश्वविद्यालय, मोहाली की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आंशी ने डिज़ाइनर दवाओं के विकास में एआई के उपयोग पर अपने विचार साझा किए। इसके अतिरिक्त, एनआईटीटीटीआर, चंडीगढ़ के इनफार्मेशन मैनेजमेंट एवं इमर्जिंग इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. मैत्रेयी दत्ता ने टीचिंग, लर्निंग एंड रिसर्च के लिए एआई टूल्स पर विस्तृत जानकारी प्रदान की।
एफडीपी के दौरान प्रतिभागियों ने डॉ. इंदरजोत और डॉ. प्रियंका के समन्वयन में परियोजना-आधारित गतिविधियों तथा एआई आधारित प्रॉब्लम सॉल्विंग सेशंस में भी सक्रिय भागीदारी की। इन सत्रों ने प्रतिभागियों को उभरती हुई एआई तकनीकों का उपयोग वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में करने का व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया।
कार्यक्रम का समापन पंजाब बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेटर (पीबीटीआई), मोहाली के औद्योगिक भ्रमण के साथ हुआ, जहाँ प्रतिभागियों को अत्याधुनिक रिसर्च, इन्नोवेशन, इन्क्यूबेशन तथा उद्यमिता से संबंधित गतिविधियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त, द कॉस्मिक रिवर की फाउंडर मिस जैस्मिन जैज़ द्वारा मेडिटेशन एवं माइंडफुलनेस पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, माइंडफुलनेस तथा स्ट्रेस मैनेजमेंट के प्रभावी उपायों पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया गया।
कार्यक्रम समापन उपरांत सीसीटी, सीजीसी लांडरां के बायोटेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट की एचओडी डॉ. गुरप्रीत कौर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) ने प्रतिभागियों की एआई संबंधी दक्षताओं को सुदृढ़ बनाने, फोस्टरड इंटरडिसीप्लीनरी कोलेबोरेशन को बढ़ावा देने तथा सीसीटी, सीजीसी लांडरां की शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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