दो महीने में आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका को दिया जाएगा मोबाइल – मंत्री बिजेंद्र यादव

by Manu
मंत्री बिजेंद्र यादव

पटना, 25 अप्रैल 2026: समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले आईसीडीएस निदेशालय की ओर से पटना के ज्ञान भवन में पोषण पखवाड़ा-2026 का समापन किया गया। इस मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उपमुख्यमंत्री सह समाज कल्याण मंत्री बिजेंद्र यादव ने दिव्यांगता प्रोटोकॉल तथा दिव्यांगता जांच अनुसूची (डीएसएस) का औपचारिक शुभारंभ किया। विभागीय सचिव बंदना प्रेयषी ने कहा कि आगामी दो महीने में आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिका को एंड्रायड आधारित मोबाइल फोन दिया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि डीएसएस एक सरल चेकलिस्ट है, जिससे आंगनबाड़ी कार्यकताएं 0-6 वर्ष के बच्चों में मोटर विकास, भाषा-संचार, संज्ञानात्मक विकास, सामाजिक-भावनात्मक व्यवहार, दृष्टि और श्रवण जैसे छह क्षेत्रों में विकासात्मक देरी की आसानी से पहचान कर सकेंगी। इसके साथ ही आंगनबाड़ी आशा/एएनएम, आरबीएसके टीम जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) तक मजबूत रेफरल प्रणाली स्थापित की जा रही है। इसके अलावा उन्होंने “हमारे बच्चे, हमारा परिवार” नाम से व्हाट्सएप कम्युनिटी चैनल का लोकार्पण किया। इसके माध्यम से पोषण, देखभाल, प्रारंभिक शिक्षा और मस्तिष्क विकास से जुड़ी जानकारियां सीधे परिवारों तक पहुंचेगी।

उपमुख्यमंत्री-सह-मंत्री के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ईसीसीई) के तहत 6 वर्ष पूर्ण कर चुके बच्चों को विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरित किया गया। उन्होंने आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका और कर्मियों के लिए गए कार्यों का सराहना किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने कहा कि पोषण पखवाड़ा-2026 के दौरान पूरे बिहार में लगभग 71 लाख से अधिक गतिविधियां आयोजित की गईं। पोषण माह-2025 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद बिहार ने देशभर में प्रथम स्थान हासिल किया था। उसी निरंतरता में पोषण पखवाड़ा-2026 में भी बिहार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

सचिव ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर दी जा रही सुविधाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, बच्चे के जीवन के पहले 6 वर्ष शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास की मजबूत नींव होते हैं। इस अवधि में लगभग 85 प्रतिशत मस्तिष्क विकास पूरा हो जाता है। यदि इस दौरान उचित पोषण, संवाद, खेल-आधारित सीख और समय पर हस्तक्षेप नहीं मिलता, तो बच्चे के पूरे भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है।

इस पखवाड़े के दौरान राज्य में पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है। इनमें मातृ एवं शिशु पोषण, 0-3 वर्ष के बच्चों का प्रारंभिक मस्तिष्क विकास, 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल-आधारित शिक्षा, स्क्रीन टाइम में कमी और आंगनबाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ीकरण रहा।

पूरे राज्य में माता-पिता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और समुदाय को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाए गए। इनमें आंगनबाड़ी केंद्रों, वीएचएसएनडी सत्रों, गृह भ्रमण, पोषण रैलियों, गोदभराई, अन्नप्राशन और माता समिति बैठकों जैसी गतिविधियां शामिल रहीं। बिहार में कुपोषण की स्थिति में लगातार सुधार देखा जा रहा है। उम्र के अनुसार कम लंबाई की स्थिति एनएफएचएस-5 में 42.9 प्रतिशत थी, जो घटकर मार्च 2026 के पोषण ट्रैकर के अनुसार 40.60 प्रतिशत तक पहुंची है।

अंडरवेट अर्थात उम्र के अनुसार कम वजन की स्थिति एनएफएचएस-5 में 41 प्रतिशत थी, जो घटकर पोषण ट्रैकर मार्च 2026 में 19.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। वेस्टिंग अर्थात लंबाई के अनुसार कम वजन की स्थिति एनएफएचएस-5 में 22.9 प्रतिशत थी, जबकि पोषण ट्रैकर मार्च 2026 में यह 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है।

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