किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है, टमाटरों की खेती
– मंडी में 2 रुपए किलो बिक रहा लाल टमाटर
– सरकार को सब्जियों पर भी एमएसपी देनी चाहिए : किसान
पटियाला, 7 मार्च : किसानों के लिए इस साल लाल टमाटरों की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। पटियाला जिले के हलका सनौर का एरियां सब्जियों की खेती के लिए मशहूर माना जाता है, इस कारण इस एरिया के खेत टमाटरों के साथ लाल ही लाल दिखाई देते हैं। कस्बा सनौर और अन्य क्षेत्रों में टमाटर की और ज्यादा काश्त होने के बाद अब अच्छा दाम ना मिलने के कारण किसान रो उठा है। मंदे भाव ने किसानों की कमर तोड़ दी है, दो महीने पहले जब टमाटर बाहर से आ रहा था, उस समय टमाटर 70 से 80 रुपए प्रति किलो के हिसाब के साथ मार्केट में बिक रहा था परन्तु अब जब किसानों की टमाटर की खेती पक्व कर मंडी में आ रही है, अब किसानों को टमाटर का भाव दो रुपए किलो प्रति किलो के हिसाब के साथ मिल रहा है। किसानों का कहना है कि इस बार उन्हों ने बीज भी अच्छी किस्म का बीजा है और टमाटर भी सेब के बराबर उतरा है परन्तु अच्छा भाव न मिलने कारण हमारी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। हमें भाव सही न मिला तो हम अपनी टमाटरों की फसल खेत में ही जोतने के लिए मजबूर हो जायेंगे। उन्होंने बताया कि एक किले में दो से ढाई लाख रुपए का टमाटरों को लगाने का खर्च आता है, हम पांच एकड़ टमाटर बीजे हैं और साथ मेरे भाई ने 10 किले में टमाटर लगाऐ हैं हमने असली क्वालिटी लगाई है। यहां के टमाटर हमेशा पंजाब में ही नहीं, हरियाणा समेत दूसरे राज्यों में भी जाते हैं कस्बा सनौर और अन्य क्षेत्रों में टमाटर की और ज्यादा काश्त होने के बाद अब अच्छा भाव न मिलने के कारण किसान रो उठा है।
टमाटर का कम से कम समर्थन मूल्य तय करे सरकार : किसान
किसानों ने कहा कि टमाटरों की खेती करने वाला किसान लाखों रुपए के घाटे में जा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार चाहती है कि फसली विभिन्नता लाईजाए। ऐसा करने वाले किसानों को तो फसल का पूरा मूल्य भी नहीं मिलता। उन्होंने सरकार से माँग की है कि टमाटर का कम से कम समर्थन मूल्य तय किया जाना चाहिए, नहीं तो किसान पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
1500 से 1600 सो रुपए बिकने वाला टमाटर 40 से 50 रुपए प्रति क्रेट बिक रहा है
कई किसानों ने ताजा फसल की तोड़ाई भी रोक दी है। उन्होंने कहा कि 1500 से 1600 रुपए बिकने वाला टमाटर 40 से 50 रुपए प्रति क्रेट बिक रहा है। सही मूल्य न मिलने करके वह तोड़ाई की मजदूरी भी अपनी ओर से खर्च करेंगे। किसान दुविधा में हैं कि वह अपनी फसल को इसी तरह ही सडऩे दे या पशुओं के लिए खुला छोड़ दें। ऐसे हालात में तकरीबन कई किसानों ने टमाटर की काश्त करने से तौबा कर ली है। एक- दूसरे से बड़ी किसान हितैषी कहते ना थकने वाली केंद्र व राज्य सरकारों में से किसी ने भी किसानों की जमीनी हकीकत समझने व इसके हल करने की ओर सार्थक कदम नहीं उठाए।
किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है, टमाटरों की खेती
मंडी में 2 रुपए किलो बिक रहा लाल टमाटर
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