लखनऊ, 25 सितंबर 2026। हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स के नाम पर किए जा रहे भ्रामक स्वास्थ्य दावों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में बड़ी कार्रवाई की गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की संयुक्त टीमों ने राज्य के 13 जिलों में अभियान चलाकर करीब 1 करोड़ रुपये मूल्य का संदिग्ध माल सीज किया है।
अभियान के दौरान अधिकारियों ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों और इकाइयों का निरीक्षण किया। इनमें आगरा, बाराबंकी, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, झांसी, प्रयागराज, मुरादाबाद, लखनऊ, बरेली, हाथरस, मथुरा, गोरखपुर और वाराणसी शामिल हैं।
63 इकाइयों का निरीक्षण, 43 नमूने लिए गए
कार्रवाई के दौरान कुल करीब 63 इकाइयों का निरीक्षण किया गया और 43 नमूने लिए गए। विभाग के अनुसार कुछ उत्पादों पर ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावे पाए गए जो नियमों के अनुरूप नहीं थे।
अधिकारियों ने हेल्थ सप्लीमेंट, न्यूट्रास्यूटिकल्स और डाइटरी फूड सप्लीमेंट्स के निर्माताओं, रिलेबलर्स, रीपैकर्स और थोक विक्रेताओं के यहां जांच की।
लखनऊ में करीब 39.50 लाख रुपये का माल सीज
लखनऊ में जेवीएस फूड्स प्राइवेट लिमिटेड के निरीक्षण के दौरान पांच नमूने लिए गए और करीब 39.50 लाख रुपये मूल्य के खाद्य पदार्थ सीज किए गए।
विभाग के अनुसार वहां मिसब्रांडिंग और भ्रामक दावों के साथ स्वच्छता से जुड़ी कमियां भी पाई गईं।
वहीं एक अन्य प्रतिष्ठान में न्यूट्रास्यूटिकल्स के साथ करीब 10 लाख रुपये मूल्य की एलोपैथिक दवाएं भी मिलीं।
नोएडा और गाजियाबाद में भी कार्रवाई
गौतमबुद्धनगर में एक कंपनी से तीन नमूने लिए गए और करीब छह लाख रुपये का माल सीज किया गया। गाजियाबाद में भी मिसब्रांडेड और भ्रामक दावों से जुड़े नमूने लिए गए तथा करीब 27 लाख रुपये का माल जब्त किया गया।
आगरा में एक प्रतिष्ठान के उत्पादों के लेबल पर ‘पावरफुल रिजल्ट’ और ‘क्विक रिकवरी’ जैसे दावे पाए गए। विभाग ने इन दावों को भ्रामक मानते हुए आगे कानूनी कार्रवाई प्रस्तावित की है।
FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने और उपभोक्ताओं को भ्रामक स्वास्थ्य दावों से गुमराह करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
आखिर क्या होते हैं न्यूट्रास्यूटिकल्स?
न्यूट्रास्यूटिकल्स आम तौर पर ऐसे खाद्य या खाद्य-आधारित उत्पाद होते हैं जिनमें विटामिन, मिनरल, प्रोटीन, ओमेगा-3, प्रोबायोटिक्स या अन्य पोषक तत्व शामिल हो सकते हैं।
हालांकि ऐसे उत्पादों को दवाओं के समान समझना उचित नहीं है। इनके बारे में किए जाने वाले स्वास्थ्य संबंधी दावों पर भी नियम लागू होते हैं।
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