लखनऊ, 08 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश में धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे और स्थानीय स्तर पर खास महत्व रखने वाले पेड़-पौधों की प्रजातियों को बचाने के लिए वन विभाग ने कदम बढ़ाया है। विभाग ने भूले-बिसरे पेड़-पौधों की प्रजातियों को फिर से जीवित करने की योजना बनाई है।
विभागीय नर्सरियों में स्थानीय महत्व और पारंपरिक उपयोग वाली ऐसी प्रजातियों की पौध तैयार की जाएगी जिनका अस्तित्व और प्राकृतिक प्रसार समय के साथ कम होता गया है। इनमें कैथा-खिरनी से लेकर बड़हल तक के पौधे शामिल हैं।
विकास की तेज रफ्तार और बदलते पर्यावरण के बीच धीरे-धीरे हाशिये पर पहुंच रही प्रदेश की पारंपरिक पेड़-पौधों की प्रजातियों को वन विभाग फिर से जीवन देने की तैयारी में है। योजना के अनुसार क्षेत्रवार ऐसे पेड़-पौधों की प्रजातियां चिह्नित की जाएंगी जो स्थानीय पारिस्थितिकी जैव विविधता औषधीय उपयोग अथवा लोक परंपराओं से जुड़ी रही हैं।
इनके बीज और रोपण सामग्री जुटाकर विभागीय नर्सरियों में पौध तैयार की जाएगी। तैयार पौध को संबंधित क्षेत्रों में रोपित कर इनके संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया जाएगा।
इसके तहत जिलेवार लक्ष्य तय किया जाएगा कि किस जिले में कौन-सी प्रजाति और कितनी संख्या में तैयार की जानी है। इससे नर्सरी में आने वाले अधिकारी या अन्य लोग भी देख सकेंगे कि संबंधित जिले में किन पारंपरिक प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम किया जा रहा है।
तैयार पौध को उनके प्राकृतिक और स्थानीय क्षेत्रों में रोपित कर इनके अस्तित्व को मजबूत किया जाएगा। वन विभाग की नर्सरियों में एक निर्धारित हिस्से को भूली-बिसरी प्रजातियां के कोने के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां इन प्रजातियों की पौध तैयार होने के साथ उनकी पहचान और संरक्षण की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा सकेगी।
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